यात्रा मार्ग और पवित्र दर्शन 
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अमरनाथ यात्रा औपचारिक रूप से संपन्न

छड़ी मुबारक पहुंची पवित्र गुफा

श्रीनगर : दक्षिण कश्मीर हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर में शुक्रवार तड़के भगवान शिव की पवित्र छड़ी ‘छड़ी मुबारक’ के पहुंचने के साथ इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा औपचारिक रूप से संपन्न हो गई। भगवा वस्त्रों से सजी पवित्र छड़ी को लेकर साधुओं का दल महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में शेषनाग पड़ाव से करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर गुफा तक पहुंचा। वहां वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के साथ यात्रा के समापन की पारंपरिक रस्में निभाई गईं।

57 दिनों तक चली यात्रा

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई को शुरू हुई थी और रक्षाबंधन के दिन शुक्रवार को इसका औपचारिक समापन हुआ। हालांकि, खराब मौसम और मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रशासन ने नौ अगस्त को तीर्थयात्रा स्थगित कर दी थी। इसके करीब तीन सप्ताह बाद ‘छड़ी मुबारक’ की परंपरागत पूजा के साथ यात्रा की औपचारिक समाप्ति हुई।

यात्रा के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहलगाम और अन्य मार्गों से पवित्र गुफा पहुंचे। इस साल कुल 4.80 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा अमरनाथ के दर्शन किए।

छह किलोमीटर पैदल गुफा पहुंचे साधु

अधिकारियों के अनुसार, ‘छड़ी मुबारक’ के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में साधुओं और श्रद्धालुओं का दल शुक्रवार सुबह शेषनाग से रवाना हुआ। दल ने करीब छह किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता पैदल तय किया और अमरनाथ गुफा मंदिर पहुंचा।

गुफा पहुंचने के बाद पवित्र छड़ी को प्राकृतिक हिम शिवलिंग के समक्ष स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग को श्रद्धालु भगवान शिव का स्वरूप मानते हैं।

पहलगाम से 42 किलोमीटर की यात्रा

परंपरा के अनुसार साधुओं और श्रद्धालुओं के दल ने पहलगाम से अमरनाथ गुफा तक करीब 42 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। इस दौरान चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी प्रमुख पड़ाव रहे। यात्रा मार्ग के इन पड़ावों पर रात्रि विश्राम के बाद दल आगे बढ़ता रहा।

ऊंचाई, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बदलते मौसम के बावजूद पवित्र छड़ी की यह यात्रा धार्मिक परंपरा के अनुसार पूरी की गई। गुफा में पूजा के बाद ‘छड़ी मुबारक’ ने वापसी यात्रा शुरू कर दी।

रविवार को पूजन और विसर्जन

अधिकारियों ने बताया कि यात्रा की अगली महत्वपूर्ण रस्म ‘पूजन’ और ‘विसर्जन’ रविवार को पहलगाम में लिद्दर नदी के तट पर होगी। इस अनुष्ठान के बाद पवित्र छड़ी को दशनामी अखाड़ा स्थित अमरेश्वर मंदिर में उसके पारंपरिक निवास स्थान पर वापस लाया जाएगा।

इसके साथ ही अमरनाथ यात्रा से जुड़ी प्रमुख धार्मिक परंपराएं भी पूरी हो जाएंगी। ‘छड़ी मुबारक’ की वापसी को यात्रा के पारंपरिक समापन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

मौसम ने डाली थी बाधा

इस बार यात्रा को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और मार्ग को हुए नुकसान के कारण बीच में ही रोकना पड़ा था। नौ अगस्त को तीर्थयात्रा स्थगित किए जाने के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई। पहाड़ी इलाकों में बारिश और रास्तों की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई।

इसके बावजूद यात्रा की पारंपरिक समापन रस्में निर्धारित धार्मिक कार्यक्रम के अनुसार पूरी की गईं। शुक्रवार को पवित्र गुफा में ‘छड़ी मुबारक’ की पूजा के साथ 57 दिनों तक चली इस साल की अमरनाथ यात्रा का औपचारिक अध्याय पूरा हो गया।

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