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अस्पताल में नवजात की 'चोरी' का आरोप ! , परिजनों ने जताया विरोध

डॉक्टर बोले- यह 'फैन्टम प्रेगनेंसी ' का है मामला

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

नदिया : नदिया जिले के मुख्यालय कृष्णनगर स्थित जिला सदर अस्पताल बुधवार को रणक्षेत्र बन गया। मामला एक नवजात की कथित चोरी से जुड़ा था, जिसने देखते ही देखते अस्पताल परिसर में भारी तनाव पैदा कर दिया। एक ओर जहाँ परिवार का आरोप है कि प्रसव के बाद उनका बच्चा गायब कर दिया गया, वहीं अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के एक चौंकाने वाले दावे ने सबको सन्न कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि महिला कभी गर्भवती थी ही नहीं!

क्या है पूरा मामला?

नवद्वीप ब्लॉक के चरकाष्ठशाली की रहने वाली मम्पी खातून के परिजनों का दावा है कि वह पिछले 10 महीनों से गर्भवती थीं। बुधवार सुबह उन्हें प्रसव पीड़ा (Labor Pain) होने पर कृष्णनगर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मम्पी के पिता सहार शेख ने बताया कि उनकी बेटी का इलाज पिछले कई महीनों से इसी अस्पताल के आउटडोर विभाग में स्त्री रोग विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा था। डॉक्टरों ने ही 28 जनवरी को प्रसव की संभावित तारीख (EDD) दी थी।

परिजनों का आरोप है कि बुधवार दोपहर को मम्पी ने संतान को जन्म दिया, लेकिन उसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्चे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। काफी देर इंतजार करने के बाद जब परिजनों ने सवाल किए, तो अस्पताल प्रशासन ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि मम्पी के गर्भ में कोई बच्चा था ही नहीं।

डॉक्टर का दावा: ' फैन्मटम प्रेगनेंसी ' (Phantom Pregnancy)

इस गंभीर आरोप पर सफाई देते हुए कर्तव्यस्थ चिकित्सक भवतोष भौमिक ने एक अलग ही कहानी पेश की। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला 'फैन्मटम प्रेगनेंसी' का है। उनके अनुसार, महिला मानसिक रूप से खुद को गर्भवती मान बैठी थी। इस स्थिति में शरीर में गर्भावस्था जैसे लक्षण (पेट का बढ़ना, मासिक धर्म रुकना आदि) दिखाई देने लगते हैं, जबकि वास्तव में गर्भ में कोई भ्रूण नहीं होता। डॉक्टर का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद जांच में पाया गया कि वह गर्भवती नहीं थीं।

अस्पताल में भारी हंगामा और पुलिस की कार्रवाई

डॉक्टरों की इस बात को सुनने के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका सीधा आरोप है कि अस्पताल ने बच्चा चोरी कर लिया है और अब अपनी गलती छिपाने के लिए 'बीमारी' का बहाना बना रहा है। गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति बिगड़ती देख कोतवाली थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को समझा-बुझाकर शांत कराया।

उठ रहे हैं कई सवाल

इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि अगर महिला गर्भवती नहीं थी, तो 10 महीने तक आउटडोर में उसका इलाज किस आधार पर चल रहा था? क्या डॉक्टरों ने पहले अल्ट्रासाउंड या अन्य बुनियादी जांचें नहीं की थीं? फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और अस्पताल की रिपोर्टों को खंगाला जा रहा है।

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