ठाणे : ठाणे पुलिस द्वारा भिवंडी की एक स्थानीय अदालत में महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) प्रश्नपत्र लीक मामले से जुड़ा लगभग 3,500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया गया है। इस सनसनीखेज मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ता बिजेंद्र गुप्ता सहित कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, इस अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपियों को पकड़ा और उनके पास से प्रश्नपत्रों के चार सेट बरामद किए।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आगरा स्थित ‘महिम पत्रन प्राइवेट लिमिटेड’ प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों ने बेहद शातिर तरीके से सुरक्षा व्यवस्था को चकमा दिया। प्रेस के दो कर्मचारियों और एक पूर्व कर्मचारी ने परीक्षा के प्रश्नपत्रों को मोड़कर अपने जूतों के अंदरूनी तलवों में छिपा लिया और उन्हें बाहर ले आए। हैरानी की बात यह है कि सुरक्षाकर्मियों ने कपड़ों की तलाशी तो ली, लेकिन जूतों की जांच नहीं की।
सुरक्षा की इतनी बड़ी सेंधमारी और गोपनीयता से खिलवाड़ जैसी बड़ी साजिश के पीछे मामूली लालच सामने आया है। आरोपपत्र के अनुसार, प्रश्नपत्र चुराने और बाहर पहुंचाने के एवज में प्रिंटिंग प्रेस के उन कर्मचारियों को केवल 8,000-8,000 रुपये दिए गए थे। इसके अलावा, उन्हें आगरा में जमीन के भूखंड (प्लॉट) देने का झूठा वादा भी किया गया था।
पुलिस ने एक कोचिंग संस्थान के पूर्व शिक्षक बिजेंद्र गुप्ता को इस पूरे गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड बताया है। गुप्ता का आपराधिक इतिहास रहा है और उसका नाम पहले ओडिशा में भी प्रश्नपत्र लीक के मामले में सामने आ चुका था। इस मामले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो प्रमुख सहयोगी (अशोक साव और प्रकाश मिसाल) अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है।
महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (एमएससीई) के अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि बरामद सामग्री असली प्रश्नपत्रों से हूबहू मिलती है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात और परीक्षा कदाचार से संबंधित सख्त धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) इसका अध्ययन कर रहा है, और पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आगे की कड़ियों को जोड़ते हुए जल्द ही एक पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया जाएगा।