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चुनाव से पहले बारासात के विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती ने दिया यह इशारा, कहा - ममता बनर्जी के फैसले पर टिकी नजर

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बारासात/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'परिवर्तन' के दौर से ही अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले बारासात के स्टार विधायक और मशहूर अभिनेता चिरंजीत चक्रवर्ती ने एक बड़ा बयान दिया है। शनिवार को विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि वह आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव में चुनावी मैदान में नहीं उतरना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी उन्हें उम्मीदवार बनाना चाहें, तो बात अलग है।

ऊर्जा की कमी को बताया मुख्य कारण

चिरंजीत चक्रवर्ती 2011 से बारासात विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। चौथी बार चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर उन्होंने बड़ी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "अब वह पहले जैसी ऊर्जा नहीं रही। लोगों के साथ खड़े होने की जो क्षमता पहले थी, उसमें अब कमी आई है। मैं अब उतनी तेज दौड़-भाग नहीं कर सकता। जैसे फिल्मों में अब मैं फाइट सीन नहीं कर पाता और मेरी भूमिकाएं बदल रही हैं, वैसे ही मुझे राजनीति में भी इस बदलाव को स्वीकार करना चाहिए।" उनके अनुसार राजनीति एक कठिन परिश्रम वाला क्षेत्र है और वह अब इस जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं।

ममता बनर्जी के प्रति अटूट विश्वास

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या ममता बनर्जी अपने इस भरोसेमंद चेहरे को चुनाव लड़ने से हटने की अनुमति देंगी? इस पर चिरंजीत ने कहा कि ममता बनर्जी 'दूरदर्शिता' की धनी हैं और उन्हें मना करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं दीदी से अनुरोध कर सकता हूँ, लेकिन वह बेहतर जानती हैं कि उन्हें किसकी और कितनी आवश्यकता है।" गौरतलब है कि 2021 के चुनाव से पहले भी चिरंजीत ने चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन ममता बनर्जी के भरोसे के कारण उन्होंने चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत हासिल की।

सफलता का शानदार सफर

चिरंजीत चक्रवर्ती का राजनीतिक करियर काफी प्रभावशाली रहा है। 2011 में जब बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ, तब से लेकर 2016 और 2021 तक उन्होंने लगातार माकपा उम्मीदवारों को हराकर अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। सिनेमाई दुनिया से राजनीति में आने के बावजूद उन्होंने बारासात के लोगों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। अब देखना यह होगा कि 2026 में बारासात की जनता को नया चेहरा मिलता है या ममता बनर्जी एक बार फिर अपने 'तुरुप के इक्के' पर ही दांव खेलती हैं।

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