नई दिल्ली: करीब एक महीने से जारी छात्र आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया। केंद्र सरकार और Cockroach Janta Party (CJP) के बीच हुई तीसरे दौर की वार्ता में सहमति बनने के बाद आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ सरकार ने आंदोलनकारियों की अन्य प्रमुख मांगें भी स्वीकार कर लीं।
तीसरे दौर की वार्ता से पहले ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।
प्रधान ने लिखा, "यह मेरे व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं है। भारत की युवा शक्ति ही इस देश की असली ताकत है। मेरा संकल्प है कि देश के युवाओं को भ्रम और अनिश्चितता के दुष्चक्र में नहीं फंसने देंगे।"
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा होते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। आंदोलनकारियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया और नारेबाजी के बीच जश्न मनाया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत डिपके के नेतृत्व वाली CJP ने अपनी संशोधित मांगों की सूची सरकार के सामने रखी। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।
सरकार द्वारा स्वीकार की गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं।
आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता।
रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पुलिस की ओर से सार्वजनिक माफी।
NEET पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन पिछले एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी था। बाद में यह देश के कई शहरों तक फैल गया और राष्ट्रीय स्तर का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनने के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की और इसे छात्रों की एक बड़ी जीत बताया।