नई दिल्ली : संसद में सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने से जुड़े नोटिस के मुद्दे पर फैसला बुधवार तक हो सकता है। इसके बाद विपक्ष का अगला निशाना मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष उनके खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है और यह नोटिस राज्यसभा में पेश किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार, यह मुद्दा सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में हुई विपक्षी इंडिया गठबंधन की रणनीति बैठक में उठाया गया। यह बैठक बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत के बाद हुई थी। बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग जोरदार तरीके से उठाई।
सूत्रों का कहना है कि टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय ने बैठक में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) को लेकर सामने आ रही समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि चुनावी राज्य बंगाल में इस प्रक्रिया के कारण कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी आधार पर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष को ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई।
बताया जा रहा है कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगभग सहमत हो चुके हैं और जल्द ही औपचारिक रूप से नोटिस दाखिल किया जा सकता है। यह सहमति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि टीएमसी पिछले कुछ महीनों से सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का नोटिस लाने की मांग कर रही थी, लेकिन शुरुआत में अन्य सहयोगी दलों ने तुरंत समर्थन नहीं दिया था।
दिलचस्प बात यह भी है कि फरवरी में बजट सत्र के पहले चरण के दौरान टीएमसी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के संयुक्त हटाने के नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। हालांकि हाल ही में पार्टी ने संकेत दिया है कि वह स्पीकर के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो संवैधानिक पदों के खिलाफ लगातार अविश्वास या हटाने के प्रस्ताव संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को और बढ़ा सकते हैं। इससे पहले से ही तनावपूर्ण संबंध और ज्यादा जटिल हो सकते हैं।