भुवनेश्वर : ‘अर्नब’ चक्रवात का असर अभी खत्म भी नहीं हुआ कि कि बंगाल की खाड़ी में एक और तूफान बन गया। दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आसपास बना गहन दबाव रविवार को चक्रवाती तूफान में बदल गया। जिसके बाद ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पुड्डुचेरि की सरकारों ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
इसके अलावाइसका असर तमिलनाडु, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ पर भी देखने को मिलेगा। भारत ने इस तूफान को ‘मुरासु’ नाम दिया है, जिसका अर्थ युद्ध का नगाड़ा होता है। यह तूफान और तेज होकर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह तीन नवंबर की सुबह नेल्लोर और नरसापुर के बीच आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है।
120 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी हवा
IMD के अनुसार इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रहने और तेज होकर 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का पूर्वानुमान है। ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि राज्य सरकार ने दक्षिणी हिस्से में पहले ही ‘हाई अलर्ट’ जारी कर दिया है।
सरकार ने निचले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का भी आदेश दिया है। भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने बताया कि चक्रवात के प्रभाव से ओडिशा में दो नवंबर से बारिश शुरू होगी। तीन और चार नवंबर को बारिश की तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पुड्डुचेरि में मछुआरों को समुद्री किनारे से दूर हटकर रहने के लिए कहा गया है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश में NDRF और ODRAF की टीमें तैनात कर दी गयी हैं।