नई दिल्ली : कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के 26 सितंबर के बयान को लेकर शुक्रवार को उस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि आयोग ने चुनाव संबंधी डिजिटल व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का समाधान करने के बजाय उन्हें और जटिल कर दिया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि 'इंडिया' गठबंधन द्वारा शुक्रवार से शुरू हो रहे देशव्यापी आंदोलन से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मामले में जवाबदेही तय होगी। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जारी अपने बयान में यह सुनिश्चित करने के लिए समिति गठित करने की बात कही कि चुनाव संबंधी डिजिटल मंच ‘कानूनों और नियमों के प्रावधानों का पालन करता है।’
जांच के लिए समिति क्यों गठित
जयराम रमेश ने सवाल किया कि यदि यह व्यवस्था वास्तव में कानून के अनुरूप विकसित की गई थी तो इसकी वैधानिकता की जांच के लिए अब समिति बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने 22 जनवरी, 2026 को इस डिजिटल मंच की शुरुआत करते समय दावा किया था कि इसे संविधान, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 तथा निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 का पूरी तरह पालन करते हुए तैयार किया गया है।
निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के फैसले पलट गये
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की मतदाता सूची संबंधी व्यवस्था तक पहुंच सीमित की गई और गोवा, पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के फैसलों को पलटा गया।
कानून के तहते मिले अधिकारों का उल्लंघन
जयराम रमेश के अनुसार इससे मतदाता सूची के संबंध में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को कानून के तहत मिले अधिकार प्रभावित हुए हैं। रमेश ने दावा किया कि पिछले सप्ताह सामने आए घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 24 सितंबर को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर इस स्थिति को ठीक करने की मांग की। रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आयोग की ओर से अपनाया गया तरीका कानून और संविधान से जुड़े सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं करता। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन, नागरिकों और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों की ओर से इन मुद्दों पर जवाबदेही की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन करेगा।