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अभिषेक बनर्जी-अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा, विपक्ष की मांग पर 10 घंटे होगी बहस

NEET पेपर लीक से लेकर छात्रों पर कार्रवाई तक विपक्ष के तीखे सवाल, सरकार बोली- पेपर माफिया पर होगी सबसे बड़ी चोट, 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान।

नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। पहले इस विधेयक पर छह घंटे की चर्चा तय थी, लेकिन विपक्ष की मांग पर बहस का समय बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के सांसदों को अपने विचार रखने की अनुमति दी।

बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के बोलने के लिए खड़े होते ही सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। इसी बीच स्पीकर ने महुआ मोइत्रा से अपनी सीट पर बैठने को कहा, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी एंटी पेपर लीक बिल का समर्थन करती है, लेकिन NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन पर पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में पेपर लीक के किसी भी आरोपी को सजा नहीं मिली, जो सरकार की विफलता का प्रमाण है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "जो चढ़ावा चोर को नहीं रोक पाए, वो पेपर लीक कैसे रोकेंगे?" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पेपर लीक रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है और भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों और शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस विधेयक को "ड्रामा" बताते हुए कहा कि सरकार शिक्षा सुधारों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने दावा किया कि NEET मामले में चार्जशीट किए गए अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े अधिकारियों के तबादलों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि प्रस्तावित कानून पेपर लीक के खिलाफ सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट तीन महीने के भीतर मामलों का निपटारा करेंगी, जिससे छात्रों को समय पर न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना और पेपर माफिया पर सख्त कार्रवाई करना है।

बहस शुरू होने से पहले कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति पर सवाल उठाया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष की मांग स्वीकार करते हुए चर्चा का समय छह घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे करने पर सहमति जताई।

एंटी पेपर लीक बिल में क्या है खास?

सरकार द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक या परीक्षा में धांधली के दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ तक का जुर्माना, संपत्ति जब्त करने का प्रावधान और फास्ट ट्रैक कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि इससे पेपर माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

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