MLA सेबेस्टियन एमजे पुल के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए 
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राजनीतिक शिष्टाचार की अनूठी मिसाल

केरल में मौजूदा MLA ने पूर्ववर्ती को सौंपा पुल उद्घाटन का हक

Kamlesh Pandey

कोट्टयम : केरल के कोट्टयम जिले से राजनीति में सौहार्द और शिष्टाचार की एक बेहद दुर्लभ और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। पूजर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायक सेबेस्टियन एम.जे. ने राजनीतिक द्वेष से ऊपर उठकर एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। उन्होंने खुद पीछे हटते हुए अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और पूर्व विधायक सेबेस्टियन कुलाथुंकल को एरुमेली-अमाकुन्नु पुल का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया।

क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुई परियोजना?

यह पूरा मामला एरुमेली-अमाकुन्नु पुल के निर्माण से जुड़ा है, जो स्थानीय लोगों का लंबे समय से एक बड़ा सपना था। इस पुल को तब मंजूरी मिली थी जब केरल कांग्रेस (M) के नेता सेबेस्टियन कुलाथुंकल (जो वाम लोकतांत्रिक मोर्चा यानी LDF का हिस्सा हैं) पूजर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान इस परियोजना के लिए अपने विधायक संपत्ति कोष से 80 लाख रुपये आवंटित किए थे। हालांकि, हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सेबेस्टियन एम.जे. ने कुलाथुंकल को चुनावी मैदान में हरा दिया और विधायक बने।

मौजूदा विधायक का बड़ा दिल: "श्रेय उन्हें मिलना चाहिए, जिन्होंने राशि दी"

विधायक बनने के बाद यह सेबेस्टियन एम.जे. का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। जब पुल के उद्घाटन की तैयारियां चल रही थीं, तो उन्होंने खुद पहल करते हुए सुझाव दिया कि इस पुल का उद्घाटन पूर्व विधायक कुलाथुंकल को ही करना चाहिए।

शुक्रवार को उद्घाटन समारोह के दौरान कांग्रेस विधायक ने अपनी परिपक्व सोच का परिचय देते हुए कहा, "यह एक सार्वजनिक परियोजना है। इसका पूरा श्रेय और जिम्मेदारी पूर्व विधायक को जाती है, क्योंकि अगर उन्होंने इतनी राशि आवंटित नहीं की होती, तो यह आज संभव नहीं हो पाता। चूंकि इसका पूरा श्रेय उन्हें जाता है, इसलिए असल में उन्होंने ही इसका उद्घाटन किया है।"

"राजनीति समाज का विकास है"- सेबेस्टियन एम.जे.

अपने इस फैसले पर सफाई देते हुए मौजूदा विधायक ने स्पष्ट किया कि इसमें उनके सम्मान या अहम् का कोई सवाल ही नहीं था। उन्होंने कहा:

  • गलतफहमी को किया दूर: "इससे मेरा कोई अपमान या अनादर नहीं होता। यह पूरी तरह से गलतफहमी है, ऐसा विचार मेरे मन में कभी नहीं आया।"

  • सम्मान की परंपरा: "अगर उन्होंने कोष दिया है, तो हमें उनका सम्मान करना चाहिए। राजनीति यही तो है—राजनीति समाज का विकास है।"

  • कर्तव्य बोध: "उन्होंने अपना कर्तव्य बखूबी निभाया। उसके बाद, मुझे भी अपना कर्तव्य गरिमा के साथ निभाना चाहिए।"

संयुक्त रिबन कटिंग और आधारशिला की अनूठी बात

इस कार्यक्रम की एक और सबसे अनोखी बात यह रही कि पुल की आधारशिला पर किसी भी विधायक का नाम नहीं लिखा गया था, जो राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ से बिल्कुल अलग था। उद्घाटन समारोह के दौरान मौजूदा विधायक सेबेस्टियन एम.जे. और पूर्व विधायक सेबेस्टियन कुलाथुंकल ने आपसी सौहार्द का परिचय देते हुए संयुक्त रूप से रिबन काटा, जिसके बाद कुलाथुंकल ने औपचारिक रूप से पुल का उद्घाटन किया।

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