मोदी जायेंगे तो लोकतंत्र बचेगा : ‘इंडिया’ 
टॉप न्यूज़

केंद्र में ‘चोरी की सरकार’, मोदी जायेंगे तो लोकतंत्र बचेगा : ‘इंडिया’

दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

Ravi

नयी दिल्ली : विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘वोट चोरी’ के जरिये लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए रविवार को राजधानी के रामलीला मैदान से भाजपा सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया।

गठबंधन के नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार को सत्ता से हटाये बिना लोकतंत्र की रक्षा नहीं की जा सकती और ‘चुनावी अनियमितताओं’ के लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा दिलाना उनका लक्ष्य है। कांग्रेस सहित 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम काटकर और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में ‘हेरफेर’ से चुनावों को प्रभावित किया गया।

ज्ञानेश को पाताल से भी खोज लायेंगे : खरगे

‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री पर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों के वोट कटवाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मोदी ने अपने एक प्यादे को CEC की कुर्सी पर बैठाकर लोगों के मताधिकार पर हमला कराया है। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ ज्ञानेश को पद से हटाने के लिए एकजुट हुआ है और जब तक उन्हें हटाया नहीं जाता, लड़ाई जारी रहेगी। खरगे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार पाताल में क्यों न चले जायें, हम उन्हें वहां से भी खोज लायेंगे।

जवाबदेही से बच नहीं सकेंगे मोदी, शाह और ज्ञानेश : राहुल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री अमित शाह और ज्ञानेश कुमार को ‘वोट चोरी’ के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे जवाबदेही से बच नहीं सकेंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को CEC के पद से हटाना विपक्ष का पहला लक्ष्य है।

राहुल ने चेतावनी दी कि ज्ञानेश कुमार पद से हटेंगे और जेल जायेंगे।राहुल ने मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के चुनावों में ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद करीब 3.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाये गये। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने CBI, ED, न्यायपालिका और नौकरशाही जैसी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है।

उत्तर प्रदेश में 27 लाख नाम काटे : अखिलेश

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में एक करोड़ 27 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा समर्थक मतदाताओं के नाम चुन-चुनकर हटाये गये और निर्वाचन आयोग से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने रामलीला मैदान को राजनीतिक बदलाव की हल्दीघाटी बताते हुए कहा कि भाजपा की सत्ता का अंत उत्तर प्रदेश से ही होगा।

हम हारे नहीं ‘हराया’ गया : ममता

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी SIR से प्रभावित है, लेकिन डरने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव में उन्हें हराया गया और EVM के जरिये लोकतंत्र को लूटा गया। ममता ने सभी समुदायों से भाजपा को हटाने के लिए एकजुट होने की अपील की।

चुनाव प्रक्रिया को शकुनि के पासों में बदला : तेजस्वी

राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया की तुलना महाभारत में शकुनि के पासों से करते हुए कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए सांविधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने SIR में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों के नाम कटने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है।

PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। माकपा महासचिव एमए बेबी ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्षी एकजुटता का आह्वान किया। भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने SIR को आम लोगों के मताधिकार छीनने का माध्यम बताया।

‘वोट बचाओ, देश बचाओ मार्च’

इससे पहले इंडिया गठबंधन के नेता समर्थकों के साथ खुले वाहन में मिंटो रोड-कनॉट प्लेस चौराहे से रामलीला मैदान पहुंचे। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ मार्च’ में राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और कई अन्य दलों के नेता शामिल थे। ‘इंडिया’ के नेताओं के अनुसार रैली में देशभर से आये 10 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।

कार्यकर्ताओं में भी दिखी एकजुटता

ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘महारैली’ में विपक्षी एकजुटता की झलक सिर्फ मंच पर मौजूद नेताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि मैदान में जुटे विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं के बीच भी आपसी तालमेल और उत्साह दिखाई दिया। अलग-अलग रंगों के झंडे थामे कार्यकर्ता एक साथ ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाते नजर आये। ढोल-नगाड़ों की थाप और नारों के बीच विभिन्न राज्यों से पहुंचे समर्थकों ने रैली को साझा विरोध का स्वरूप दिया।

SCROLL FOR NEXT