बुजुर्ग को मिलवाया गया परिवार से  A happy reunion in Bangaon on World Radio Day; Ham Radio becomes a 'saviour'
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विश्व रेडियो दिवस पर बनगांव में सुखद मिलन, अपनों से बिछड़े बुजुर्ग के लिए 'त्राता' बना हैम रेडियो

बिहार के पूर्णिया से रास्ता भटककर बंगाल पहुंचे अल्जाइमर पीड़ित वृद्ध

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बनगांव : आज जब पूरी दुनिया 'विश्व रेडियो दिवस' मना रही है, तब पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बोनगाँव से रेडियो की सार्थकर्ता सिद्ध करने वाली एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। कई दिनों से बोनगाँव की सड़कों पर भटक रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति को हॅम रेडियो (West Bengal Radio Club) की सक्रियता से उनके परिवार से मिला दिया गया है।

भटकते हुए बनगांव पहुंचे थे वृद्ध

घटना के अनुसार, स्थानीय लोगों ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को बनगांव की सड़कों पर बदहवास घूमते देखा और उन्हें बोनगाँव थाने ले आए। थाने के एसआई विकास चंद्र सरकार ने उनकी स्थिति देखते हुए तुरंत 'वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब' (हैम रेडियो) से संपर्क किया और मदद का अनुरोध किया। हॅम रेडियो के सदस्यों द्वारा की गई जांच में पता चला कि ये वृद्ध बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले हैं और 'अल्जाइमर' (भूलने की बीमारी) से गंभीर रूप से पीड़ित हैं।

सीसीटीवी और बस के जरिए मिला सुराग

वृद्ध के बेटे निहाल अंसारी ने बताया कि उनके पिता का नाम मोहम्मद मुस्तफा है। वे घर से बिना बताए निकल गए थे, जिसके बाद स्थानीय थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चला कि वह एक बस में सवार हुए थे। बस स्टाफ से संपर्क करने पर जानकारी मिली कि वह डंकुनी में उतरे थे। परिजन उन्हें ढूंढने बंगाल भी आए थे, लेकिन उस समय उनका कोई सुराग नहीं मिला था। अंततः हैम रेडियो के सदस्यों ने कड़ी मशक्कत के बाद परिवार का पता लगाया और उन्हें बोनगाँव थाने बुलाया।

पुलिस की संवेदनशीलता

बनगांव पुलिस ने इन बुजुर्ग व्यक्ति को बेहद सम्मान और देखभाल के साथ थाने में रखा। उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए डॉक्टरों को भी बुलाया गया। हॅम रेडियो की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य बोनगाँव के लिए रवाना हो गए हैं। 'विश्व रेडियो दिवस' के अवसर पर रेडियो इन बुजुर्ग के लिए जीवनरक्षक बनकर उभरा है।

विशेष अपील: बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये उपाय

अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारियों में इंसान अक्सर अपना पता और अपनों के नाम भूल जाता है। ऐसे में पूरे देश में हजारों बुजुर्ग घर का रास्ता नहीं खोज पाते। विशेषज्ञों और हॅम रेडियो क्लब ने नागरिकों से यह विशेष अपील की है:

  • टैटू या पहचान: यदि आपके घर में कोई बुजुर्ग भूलने की बीमारी से ग्रस्त है, तो उनके हाथ पर स्थायी रूप से उनका नाम, पता या मोबाइल नंबर का टैटू (उल्का) जरूर बनवाएं।

  • आईडी कार्ड: उनके कपड़ों में या गले में एक पहचान पत्र (Identity Card) हमेशा रखें।

  • ये छोटे कदम किसी भी अनहोनी की स्थिति में उन्हें सुरक्षित घर वापस लाने में सबसे बड़े मददगार साबित हो सकते हैं।

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