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72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: दिल्ली से बाहर गुजरात में पहली बार सजेगा सिनेमा का महामंच

केवडिया के एकता नगर में तैयार हुआ जर्मन एल्युमिनियम का भव्य ऑडिटोरियम; 1971 में चेन्नई के बाद दूसरी बार राष्ट्रीय राजधानी से बाहर हो रहा समारोह

Tanisha Hirawat

एकता नगर(गुजरात), सर्जना शर्मा

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के सात दशक से भी ज्यादा के इतिहास में दूसरी बार 72 वां पुरस्कार समारोह इस बार राजधानी दिल्ली से बाहर आयोजित किया जा रहा है। इस बार गुजरात के एकता नगर में मंगलवार 22 सितंबर को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु फिल्म जगत से जुड़ी हस्तियों को पुरस्कारों से सम्मानित करेंगी। पहली बार दिल्ली से बाहर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में 1971 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार आयोजित किया गया था ।अब 56 वर्ष के बाद फिर दिल्ली से बाहर गुजरात में 72 वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हो रहा है । देश की राजधानी दिल्ली से बाहर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार क्यों सूचना प्रसारण मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी कहते हैं कि हमारा सिनेमा अनेकता में एकता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है इसीलिए एकता के प्रतीक शहर एकता नगर में इस बार पुरस्कार समारोह रखा गया है। और वैसे भी सिनेमा पूरे देश की भाषाओं कला , संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए इसको देश की राजधानी दिल्ली से बाहर भी ले जाने की ज़रूरत है केवल गुजरात में ही नहीं देश के अन्य शहरों में भी अब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार आयोजित किए जायेंगें। वैसे भी दिल्ली के विज्ञान भवन को ढ़हा कर अब इसे सेंट्रल विस्टा का हिस्सा बनाया जाएगा। विज्ञान भवन की एनेक्सी तोड़ी जा चुकी है।

एकता नगर गुजरात में कहां हैं और कैसे एक छोटे से गांव केवडिया का नाम बदल कर एकता नगर कर दिया गया। नर्मदा घाटी में सतपुड़ा और विंध्य पहाड़ियों के बीच छोटा सा आदिवासी गांव था केवड़िया। नर्मदा नदी पर बांध बनाने के लिए 1961 में इस इलाके में 6 गांवों की भूमि का अधिग्रहण करके परियोजना अफसरों और कामगारों के लिए एक कॉलोनी बनायी गयी जिसका नाम रखा गया केवड़िया कालोनी। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस बांध को नाम दिया था नवागांव बांध बाद में इसी का नाम सरदार सरोवर परियोजना रखा गया। पूरी दुनिया जानती है कि सरदार सरोवर परियोजना के खिलाफ कितने आंदोलन किए गए लेकिन आखिरकार परियोजना पूरी हुई। वर्तमान प्रधानमंत्री और तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2010 में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 597 फीट ऊंची मूर्ति केवड़िया में लगवाने की सरकारी घोषणा की । इसके बाद 2013 में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट बनाया गया सात अक्टूबर 2013 को मूर्ति स्थापना के लिए भूमि की नींव रखी गयी। देश भर से नींव के लिए लोहा दान में मांगा गया। सरदार पटेल की मूर्ति स्वर्गीय मूर्तिकार रामदास सुतार ने बनायी।

नर्मदा नदी के किनारे सरदार सरोवर परियोजना से लगभग 100 किलोमीटर दूर केवडिया कालोनी में सरदार पटेल की मूर्ति की स्थापना की गयी। जिस मूर्ति की योजना 2010 में बनायी गयी वो साकार हुई 2018 में सरदार पटेल की जयंती पर 31 अक्टूबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मूर्ति का उद्घाटन किया। पूरे इलाके को एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में बदल दिया गया और इसको नाम दिया गया एकता नगर। ये शहर वडोदरा से लगभग 80 किलोमीटर दूर है। सरदार वल्लभ भाई पटेल जो कि स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री थे उन्होंने भारत की विभिन्न रियासतों का विलय करके भारत को एकता के सूत्र में पिरोया था। सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए मूर्ति को नाम दिया गया स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ( एकता की मूर्ति )।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए 1000 लोगों के बैठने की क्षमता का वातानूकूलित अस्थायी हाल विशेष रूप से बनाया गया है । इसी में मंगलवार को समारोह होगा। देश भर के फिल्म कलाकार, निर्माता, निर्देशक , गीतकार संगीतकार और फिल्म समीक्षक और मीडिया एकता नगर पहुंच रहा है।

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