राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है। सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को मंजूरी दे दी है, जिससे सदन का पूरा गणित बदल गया है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, भाजपा की राज्यसभा में ताकत 106 से बढ़कर 113 हो गई है, जबकि AAP की संख्या 10 से घटकर सिर्फ 3 रह गई है। जिन सात सांसदों ने पाला बदला, उनमें अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं।
इस बदलाव के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का कुल आंकड़ा राज्यसभा में 148 तक पहुंच गया है। इसमें भाजपा (113) के अलावा टीडीपी (2), जदयू (4), शिवसेना (2), आरएलडी (1), जेडीएस (1), एजीपी (1), एनसीपी (4), एआईएडीएमके (5), आरपीआई (1), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (1) और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी (लिबरल) (2) शामिल हैं। इसके अलावा कुछ मनोनीत और निर्दलीय सदस्य भी इस समीकरण का हिस्सा हैं।
AAP की ओर से अब राज्यसभा में संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह ही बचे हैं। संजय सिंह पार्टी के फ्लोर लीडर बने हुए हैं।
यह घटनाक्रम दल-बदल विरोधी कानून के तहत संभव हुआ है। दसवीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में शामिल होते हैं, तो इसे विलय माना जाता है और ऐसे सदस्यों पर अयोग्यता की कार्रवाई नहीं होती।
इससे पहले 2019 में तेलुगु देशम पार्टी के चार सांसदों के भाजपा में विलय को भी तत्कालीन राज्यसभा सभापति ने इसी आधार पर मंजूरी दी थी।