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पुलिस भर्ती की परीक्षा देने आये 6 नकली परीक्षार्थी गिरफ्तार !

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बरानगर : पश्चिम बंगाल पुलिस की भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और सॉल्वर गिरोह (Solver Gang) की संलिप्तता का पर्दाफाश हुआ है। बरानगर पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए, परीक्षा केंद्र से छह नकली परीक्षार्थियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब राज्य में नौकरी के लिए युवाओं की बड़ी मांग है, जिससे यह घटना और भी गंभीर हो जाती है।

गिरफ्तार किए गए सभी अभियुक्तों की पहचान कर ली गई है, जिनके नाम हैं: अनिमेष मंडल, दीपंकर हलदार, सुदीप्त बिस्वास, सप्तम दास, ज़िकरिया शेख, और आशीष बिस्वास। ये सभी अभियुक्त मुख्य रूप से नदिया जिले के निवासी हैं और असली उम्मीदवारों की ओर से परीक्षा देने के लिए बरानगर पहुंचे थे।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस फर्जीवाड़े में न केवल आम नागरिक, बल्कि सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। पकड़े गए छह अभियुक्तों में से एक व्यक्ति राज्य के आबकारी विभाग (Excise Department) में सहायक उप-निरीक्षक (ASI) के पद पर कार्यरत है, जबकि एक अन्य अभियुक्त राज्य पुलिस का कांस्टेबल बताया जा रहा है। सरकारी कर्मियों का सीधे तौर पर भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी करने के लिए शामिल होना, इस रैकेट के व्यापक और संगठित होने की ओर इशारा करता है।

बरानगर थाना पुलिस ने विश्वसनीय गुप्त सूचना मिलने के तुरंत बाद सक्रियता दिखाते हुए एक टीम गठित की और परीक्षा केंद्र पर छापा मारकर इन सभी 'मुन्नाभाइयों' को गिरफ्तार कर लिया।

अभियुक्त नदिया के रहने वाले हैं जो बरानगर में परीक्षा देने आये थे

हालांकि, इस बड़े खुलासे के बावजूद, पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगा है कि इस फर्जीवाड़े में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आने के कारण, स्थानीय थाने पर मामले को दबाने या हल्का करने की कोशिश की गई थी।

गिरफ्तारी के बाद, सभी छह अभियुक्तों को बैरकपुर कोर्ट में पेश किया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी अभियुक्तों को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस हिरासत में उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह फर्जीवाड़ा रैकेट कितने बड़े पैमाने पर सक्रिय है, इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड (सरगना) कौन है, और यह गिरोह किस तरह से असली उम्मीदवारों की पहचान बदलकर परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहा था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि पकड़े गए सरकारी कर्मचारी इस नेटवर्क में किस भूमिका में थे।

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