नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने 135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। इस ऐतिहासिक पुस्तकालय में 8.5 लाख से अधिक किताबें और अन्य महत्वपूर्ण पुस्तक-सामग्री मौजूद है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पुस्तकालय के लिए प्रस्तावित जगह, उपलब्ध कराए जाने वाले क्षेत्रफल और भवन की विस्तृत योजना का ब्योरा मांगा है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत पुस्तकालय के भविष्य और उसके लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने को लेकर सवाल उठे हैं। मीडिया में आई खबरों में दावा किया गया था कि नई सरकारी इमारतों की योजना में पुस्तकालय के लिए पर्याप्त जगह निर्धारित नहीं की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा के पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। पीठ ने केंद्र से हलफनामा दाखिल कर पुस्तकालय के लिए प्रस्तावित स्थान से संबंधित विस्तृत जानकारी देने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से यह बताने को कहा है कि: 1- पुस्तकालय के लिए कितने क्षेत्रफल की जगह आवंटित की जाएगी, 2-प्रस्तावित पुस्तकालय किस भवन या परिसर में होगा, 3-पुस्तकालय की वास्तविक भवन योजना क्या है, 4- 8.5 लाख से अधिक पुस्तकों को रखने के लिए किस प्रकार की व्यवस्था की जाएगी, 5- मौजूदा पुस्तकालय की आवश्यकताओं के अनुरूप नए परिसर में कितनी जगह उपलब्ध होगी, 6- स्थानांतरण के बाद पुस्तकालय के संचालन और पुस्तक-संग्रह के संरक्षण की क्या व्यवस्था होगी।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा।
स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई स्वत: संज्ञान के आधार पर कर रहा है। मामले का शीर्षक है- ‘इन री: 135-वर्ष पुराने पुस्तकालय, 8.5 लाख किताबें और सेंट्रल विस्टा योजना में कोई जगह नहीं।’
मामला हाल में प्रकाशित उन मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया, जिनमें केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के भविष्य को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, यह पुस्तकालय लंबे समय से केंद्र सरकार के प्रशासनिक परिसर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और 1969 से शास्त्री भवन की चार मंजिलों में संचालित हो रहा है।
पुस्तकालय का इतिहास और महत्व
केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय करीब 135 वर्ष पुराना संस्थान है। यह केवल सामान्य पुस्तकालय नहीं है, बल्कि सरकारी अधिकारियों, शोधकर्ताओं और अन्य पाठकों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण संदर्भ केंद्र के रूप में काम करता रहा है। पुस्तकालय में 8.5 लाख से अधिक पुस्तकें होने के कारण इसके स्थानांतरण की प्रक्रिया सामान्य कार्यालय स्थानांतरण की तुलना में काफी जटिल मानी जा रही है। इतने बड़े संग्रह को स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त भौतिक स्थान के साथ-साथ पुस्तकों के संरक्षण, वर्गीकरण, रिकॉर्ड और पाठकों की पहुंच से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी आवश्यकता होगी।
1969 से शास्त्री भवन में चल रहा है पुस्तकालय
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय 1969 से शास्त्री भवन की चार मंजिलों में संचालित हो रहा है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी कार्यालयों के लिए नए भवनों का निर्माण होने के बीच इस पुस्तकालय को भी स्थानांतरित करने की चर्चा शुरू हुई। हालांकि, कथित तौर पर शुरुआती व्यवस्था में पुस्तकालय के लिए पर्याप्त जगह को लेकर सवाल खड़े हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से कर्तव्य भवन-2 परिसर में केवल दो कमरे उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई थी।
8.5 लाख से अधिक पुस्तकों के लिए दो कमरों का सवाल
पुस्तकालय के विशाल संग्रह को देखते हुए उपलब्ध कराई जाने वाली जगह इस विवाद का प्रमुख मुद्दा बन गई। 8.5 लाख से अधिक पुस्तकों वाले पुस्तकालय के लिए केवल सीमित कमरों की व्यवस्था होने की खबरों ने यह सवाल खड़ा किया कि इतने बड़े संग्रह को किस प्रकार सुरक्षित और व्यवस्थित रखा जाएगा। इसके अलावा पुस्तकालय में केवल किताबों को रखने की ही आवश्यकता नहीं होती। पाठकों के बैठने, संदर्भ सामग्री तक पहुंच, कर्मचारियों के लिए कार्यक्षेत्र, रिकॉर्ड रखने, पुस्तक वर्गीकरण तथा अन्य पुस्तकालय संबंधी गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त जगह आवश्यक होती है। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से प्रस्तावित भवन और क्षेत्रफल का पूरा विवरण मांगा है।
केंद्र सरकार ने किया स्पष्ट
मामले के बीच केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना में केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के लिए जगह उपलब्ध कराई गई है। इस स्पष्टीकरण के बाद मुख्य प्रश्न यह है कि पुस्तकालय के लिए वास्तव में कितनी जगह निर्धारित की गई है और वह उसके विशाल पुस्तक-संग्रह तथा भविष्य की आवश्यकताओं के लिए किस प्रकार पर्याप्त होगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगा गया हलफनामा इसी स्थिति को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
सेंट्रल विस्टा योजना से जुड़ा है मामला
केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय का मुद्दा व्यापक सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना से जुड़ा हुआ है। इस परियोजना के तहत नई सरकारी इमारतों और मंत्रालयों के लिए आधुनिक कार्यालय परिसर विकसित किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था में पुराने सरकारी कार्यालयों और संस्थानों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी चल रही है। ऐसे में केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय को कहां और किस आकार के परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा, यह महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रश्न बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का महत्व
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह तय नहीं किया है कि पुस्तकालय को किस स्थान पर रखा जाना चाहिए। अदालत ने केंद्र से तथ्यात्मक और विस्तृत जानकारी मांगी है। केंद्र को अपने हलफनामे में प्रस्तावित स्थान, क्षेत्रफल और भवन योजना की जानकारी देनी होगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट यह देख सकेगा कि पुस्तकालय के लिए प्रस्तावित व्यवस्था क्या है और उससे संबंधित मुद्दों पर आगे क्या निर्देश आवश्यक हैं।
आगे क्या होगा?
अब केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा। इसमें पुस्तकालय के लिए निर्धारित क्षेत्रफल और प्रस्तावित भवन की वास्तविक योजना सहित अन्य संबंधित जानकारी सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट उपलब्ध कराई गई जानकारी और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर विचार करेगा।