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मणिपुर की दूसरी जीवन रेखा NH-37 की बिगड़ती हालत पर TDC ने जताई चिंता

घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का लगाया आरोप NHIDCL के खिलाफ जांच कराने की मांग की केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को दिया ज्ञापन

मणिपुर : ट्रांसपोर्टर्स एंड ड्राइवर्स काउंसिल (TDC) ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से नेशनल हाईवे-37 प्रोजेक्ट के काम में घटिया निर्माण और लंबी देरी का आरोप लगाया है। टीडीसी ने नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के खिलाफ तुरंत जांच कराने की मांग की है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को इस संबंध में एक ज्ञापन भेजा गया है। जिसमें काउंसिल ने इंफाल-जिरीबाम हाईवे की बिगड़ती हालत पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इसके कई हिस्से, खासकर मॉनसून के मौसम में, गाड़ियों के चलने लायक नहीं रह गए हैं। TDC ने आरोप लगाया कि सालों तक निर्माण कार्य चलने और भारी मात्रा में सरकारी फंड मंजूर होने के बावजूद, हाईवे के कई हिस्सों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। काउंसिल का दावा है कि सड़क की खराब हालत के कारण गाड़ियां अक्सर खराब हो जाती हैं। साथ ही यात्रा में ज्यादा समय लगता है। दुर्घटनाएं होती हैं और ट्रांसपोर्टर्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

निर्माण कार्यों की ठीक से नहीं हुई निगरानी

काउंसिल ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों की ठीक से निगरानी न होने के कारण बारिश में कई जगहों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ, जिससे सामान लदी और खाली गाड़ियां अक्सर खतरनाक इलाकों में फंसी रह जाती हैं। इससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा, TDC ने दावा किया कि NHIDCL ने बिना सही निगरानी के प्रोजेक्ट के बड़े हिस्से कई ठेकेदारों को सब-कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिए। इस कारण काम घटिया हुआ और जवाबदेही की कमी रही। सरकारी फंड के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए, काउंसिल ने आरोप लगाया कि भारी खर्च के बावजूद कोई खास प्रगति न होने के कारण इसकी गहन जांच होनी चाहिए। काउंसिल ने एक स्वतंत्र उच्च-स्तरीय समिति से समयबद्ध जांच कराने और अब तक हुए काम का तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की।

मणिपुर की दूसरी जीवन रेखा है NH-37

NH-37 को मणिपुर की दूसरी जीवन रेखा बताते हुए, काउंसिल ने कहा कि हाईवे की खराब हालत ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है। TDC ने मंत्रालय से जवाबदेही तय करने और गड़बड़ी या आपराधिक लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले अधिकारी या ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। इसमें पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), फंड जारी होने की स्थिति और काम की भौतिक प्रगति को सार्वजनिक करने की भी मांग की गई। इसके अलावा, काउंसिल ने मंत्रालय से कहा कि वह NHIDCL को निर्देश दे कि हाईवे के सबसे ज्यादा प्रभावित हिस्सों की मरम्मत तुरंत युद्ध स्तर पर की जाए और साथ ही चल रहे सभी कामों की क्वालिटी की कड़ी निगरानी भी सुनिश्चित की जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध-प्रदर्शन करेंगे। NHIDCL ने अभी तक इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है।

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