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पत्थरकांडी में बनेगा असम का चौथा कृषि कॉलेज, कैबिनेट ने दी मंजूरी

Krishna Das Parth

गुवाहाटी : असम सरकार ने बराक घाटी में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को बताया कि राज्य को अपना चौथा कृषि कॉलेज मिलने जा रहा है। इसके लिए राज्य मंत्रिमंडल ने कछार जिले के पत्थरकांडी में 84.6 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए कैबिनेट के फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संस्थान बराक घाटी का पहला कृषि कॉलेज होगा। इसके निर्माण से क्षेत्र में कृषि शिक्षा के विस्तार के साथ युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और शोध के नए अवसर पैदा होंगे।

कृषि शिक्षा को मिलेगा नया केंद्र

मुख्यमंत्री के अनुसार, पत्थरकांडी में प्रस्तावित कृषि कॉलेज का उद्देश्य क्षेत्र के विद्यार्थियों को कृषि से संबंधित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। संस्थान में कृषि क्षेत्र से जुड़े अध्ययन, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। सरमा ने कहा कि यह परियोजना युवाओं के लिए कृषि की पढ़ाई के साथ-साथ रिसर्च और इनोवेशन के अवसर पैदा करेगी। इससे बराक घाटी के विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने और नई तकनीकों पर काम करने का अवसर मिल सकता है।

84.6 एकड़ जमीन को कैबिनेट की मंजूरी

राज्य मंत्रिमंडल ने प्रस्तावित कॉलेज के लिए पत्थरकांडी में 84.6 एकड़ जमीन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। भूमि उपलब्ध होने के बाद संस्थान की स्थापना से जुड़े अगले चरणों पर काम आगे बढ़ाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में कहा, “असम को अपना चौथा कृषि कॉलेज और बराक घाटी को अपना पहला कॉलेज मिलने जा रहा है।” उन्होंने इसे क्षेत्र में कृषि शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

बराक घाटी के युवाओं को मिलेगा लाभ

बराक घाटी में कृषि शिक्षा के लिए अलग संस्थान स्थापित होने से क्षेत्र के युवाओं को स्थानीय स्तर पर कृषि से संबंधित उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही कृषि अनुसंधान और नवाचार से जुड़े कार्यक्रमों के विकास की संभावना भी बढ़ेगी। प्रस्तावित कॉलेज के जरिए क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक खेती, कृषि अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा सकता है। सरकार का यह कदम बराक घाटी में कृषि क्षेत्र से जुड़े शैक्षणिक और अनुसंधान ढांचे के विस्तार की योजना का हिस्सा है।

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