लॉस एंजिलिस : अगले महीने इंग्लैंड के लिवरपुल में 4 से 14 सितंबर तक विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप का आयोजन किया जायेगा। इससे पहले मुक्केबाजी की नियामक संस्था ‘वर्ल्ड बॉक्सिंग’ ने गुरुवार को महिला खिलाड़ियों के लिए एक नया नियम जारी किया। दरअसल अब सभी महिला मुक्केबाजों को जेंडर टेस्ट कराना होगा। अगर टेस्ट में कोई फेल होता है तो उसे किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं होगी।
कौन सा टेस्ट कराना होगा
खिलाड़ियों का जो टेस्ट किया जायेगा वह पॉलिमरेज चेन रिएक्शन टेस्ट (पीसीआर) या इसके जेनेटिक स्क्रीनिंग के जरिए होगा। यह जन्म के समय के लिंग को निर्धारित करने के लिए जरूरी वाई क्रोमोसोम की मौजूदगी या गैरमौजूदगी की जांच करेगा। वाई क्रोमोजोम मेल चाइल्ड के लिए जिम्मेदार होता है।
क्या है PCR टेस्ट?
- पीसीआर से जैविक लिंग के सूचक के रूप में वाई गुणसूत्र की मौजूदगी या गैर मौजूदगी की पहचना की जाती है।
- इससे पता चलता है कि किसी के शरीर में वाई क्रोमोजोम है या नहीं। यह टेस्ट गाल से स्वैब या ब्लड सैंपल से किया जाता है।
- अगर टेस्ट में वाई क्रोमोसोम नहीं पाया जाता है तो मुक्केबाज विमेंस कैटेगरी में हिस्सा ले सकती है।
- अगर टेस्ट में वाई क्रोमोसोम पाया जाता हो तो मुक्केबाज विमेंस कैटेगरी में हिस्सा नहीं ले सकती हैं।
एथलेटिक्स में पहले ही लागू हो चुका है नियम
पिछले ही महीने 30 जुलाई को वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल ने कहा था कि जो खिलाड़ी इस टेस्ट से नहीं गुजरेगी, वह वर्ल्ड रैंकिंग प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले सकेगी।' एथलेटिक्स में नियम 1 सितंबर 2025 से लागू होगा। 13 सितंबर से टोक्यो में होने जा रही वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिला एथलीट्स इस टेस्ट को पास किए बिना भाग नहीं ले सकेंगी।
आखिर ऐसा करना क्यों पड़ा?
दरअसल एक साल पहले पेरिस ओलंपिक के दौरान मुक्केबाजी में जेंडर विवाद हुआ था। तब अल्जीरिया की मुक्केबाज इमान खलीफ पर पुरुष होने के आरोप लगे थे। उनकी प्रतिद्वंद्वी ने यह कहकर मुकाबला छोड़ दिया था कि मुझे पुरुषों से भिड़ा दिया गया है। खलीफ ने इस ओलिंपिक में अपनी वेट कैटेगरी (वेल्टरवेट) का गोल्ड मेडल जीता।