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विश्व कप में पदक का सूखा दूर करेंगे : हरमनप्रीत सिंह

अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के संयोजन, बेहतर तालमेल और पिछली गलतियों से सबक के दम पर हरमनप्रीत सिंह को भरोसा है कि यह विश्व कप भारतीय हॉकी के लिये सुनहरा अध्याय लिखने का सुनहरा मौका साबित हो सकता है

Deepak Ram

नयी दिल्ली : ‘टोक्यो ओलंपिक से पहले मन में जो चल रहा था, कुछ उसी तरह के भाव हैं और तैयारी भी उतनी ही मजबूत है क्योंकि हमारा एक ही लक्ष्य है कि विश्व कप में पांच दशक से पोडियम पर नहीं रहने का सिलसिला तोड़ना ही है,’ यह कहना है भारतीय हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह का। टोक्यो ओलंपिक 2020 में 41 साल बाद कांस्य पदक जीतने के बाद पेरिस में 2024 में अपनी कप्तानी में उसे दोहराने वाले हरमनप्रीत को बखूबी पता है कि कई खिलाड़ियों के लिये विश्व कप जीतने का शायद यह आखिरी मौका है। उन्होंने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा, ‘हम भी चाहते हैं कि 50 साल से विश्व कप नहीं जीत पाने के सिलसिले को वैसे ही तोड़ें, जैसे टोक्यो में 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीता था।

उसी सोच और उसी तैयारी के साथ उतरेंगे। लेकिन कोई दबाव नहीं है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी है।’ विश्व कप 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड और बेल्जियम में खेला जायेगा। भारत ने सिर्फ एक बार 1975 में कुआलालम्पुर में खिताब जीता है। इसके अलावा 1971 में बार्सीलोना में कांस्य और 1973 में एम्सटेलवीन में रजत पदक जीता था। दो ओलंपिक पदक जीत चुके भारतीय टीम के कई मौजूदा खिलाड़ी अपने कैरियर के आखिरी पड़ाव पर भी हैं और विश्व कप के जरिये भारतीय हॉकी का सुनहरा अध्याय लिखना चाहेंगे। भारत के लिये 264 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके इस अनुभवी ड्रैग फ्लिकर ने कहा, ‘पिछले कुछ मैचों में टीम के प्रदर्शन, आत्मविश्वास और एकजुटता से विश्वास बढा है कि यह सुनहरा मौका है।

अनुभवी खिलाड़ियों के लिये यह और भी अहम है क्योंकि कुछ खिलाड़ियों का यह आखिरी विश्व कप हो सकता है और उनसे काफी अपेक्षायें हैं।’ उन्होंने कहा, ‘वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके मिसाल बनना चाहेंगे ताकि आने वाली पीढी को इसी तरह से खेलने की प्रेरणा मिले।’ हरमनप्रीत ने हालांकि स्वीकार किया कि लक्ष्य तक पहुंचना आसान नहीं होगा और इसके लिये काफी मेहनत करनी होगी। उन्होंने कहा, ‘लक्ष्य तक पहुंचने की राह आसान नहीं है, इसलिये बहुत मेहनत करनी होगी । हम हार नहीं मानने की सोच के साथ खेलते हैं और इसे दिमाग में हमेशा रखेंगे।’ टीम की वास्तविक संभावनाओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘विश्व कप में किसी टीम को हलके में नहीं ले सकते।

सभी अपना सौ प्रतिशत देने और जीत की मानसिकता से आयेंगी। हम मैच दर मैच रणनीति बनायेंगे और जरूरत से ज्यादा आगे की नहीं सोचेंगे।’ प्रो लीग के यूरोप चरण में भारत ने कुछ अच्छे मैच खेले लेकिन टीम नौ टीमों की तालिका में पाकिस्तान से ऊपर आठवें स्थान पर रही। हरमनप्रीत ने कहा कि प्रो लीग की गलतियों से सबक लेकर उनकी टीम खेलेगी क्योंकि विश्व कप में दूसरा मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘प्रो लीग में हम नीदरलैंड और जर्मनी जैसी टीमों के खिलाफ भी जीते। ऐसे टूर्नामेंटों में आप प्रयोग करते हैं, बहुत कुछ सीखते हैं और विरोधी के बारे में विश्लेषण करते हैं। विश्व कप हालांकि ऐसा टूर्नामेंट है जिसमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा लिहाजा छोटी छोटी गलतियों से भी बचना होगा।’

उन्हें यकीन है कि पेनल्टी कॉर्नर के अलावा भारत अधिक फील्ड गोल भी करेगा क्योंकि फॉरवर्ड पंक्ति का आपसी तालमेल बहुत अच्छा है। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ मैचों में हमने काफी फील्ड गोल किये हैं। गोल कौन कर रहा है, यह मायने नहीं रखता लेकिन मौकों का इस्तेमाल करना जरूरी है। फॉरवर्ड पंक्ति का तालमेल अच्छा है और मुझे उन पर पूरा भरोसा है।’ यह पूछने पर कि वीडियो विश्लेषण और तकनीक के दौर में ड्रैग फ्लिक में नवीनता लाना कितना मुश्किल है, उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल यह मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि सभी वीडियो विश्लेषण करते हैं।

लेकिन छोटी छोटी चीजों पर काम कर रहे हैं। हम भी विरोधी टीमों का पीसी डिफेंस देखकर रणनीति बनाते हैं कि कहां गोल की गुंजाइश हो सकती है।’ विश्व कप में पदार्पण कर रहे खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए हरमनप्रीत ने कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय हॉकी का पर्याप्त अनुभव है और बतौर कप्तान सकारात्मक संवाद के साथ टीम से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, ‘पहली बार खेल रहे युवाओं के साथ हम अपना अनुभव साझा कर रहे हैं। बतौर कप्तान मैं सकारात्मक संवाद में विश्वास करता हूं। एक दूसरे का सहयोग करना, अपनी जिम्मेदारी को निभाना बड़े टूर्नामेंट में अहम है।’

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