जयपुर : अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) के उपाध्यक्ष और भारतीय दिग्गज विश्वनाथन आनंद का मानना है कि अगर आर प्रज्ञानानंदा कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर मौजूदा चैंपियन और हमवतन डी गुकेश को चुनौती देते हैं तो इस साल की विश्व चैंपियनशिप चेन्नई में हो सकती है। प्रज्ञानानंदा उन आठ खिलाड़ियों में शामिल हैं जो इस वर्ष मार्च-अप्रैल में होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में खेलेंगे। इस टूर्नामेंट का विजेता खिलाड़ी विश्व चैंपियनशिप में गुकेश का सामना करेगा। फैबियानो कारुआना, हिकारू नाकामुरा, अनीश गिरी, वेई यी, जावोखिर सिंदारोव, एंड्री एसेपेंको और मैथियास ब्लूबाउम अन्य खिलाड़ी हैं जिन्होंने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया है। आनंद ने कहा, ‘जो भी खिलाड़ी कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में जीतेगा वह विश्व चैंपियनशिप में कड़ी चुनौती पेश करेगा।
मुझे लगता है कि अगर प्रज्ञानानंदा क्वालीफाई करने में सफल रहता है तो यह मुकाबला दोनों भारतीय खिलाड़ियों के लिए भावनात्मक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होगा।’ आनंद जयपुर साहित्य महोत्सव में अपनी नई किताब 'लाइटनिंग किड: 64’ का प्रचार करने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर प्रज्ञानानंदा और गुकेश आमने-सामने होंगे तो यह सामान्य मुकाबला नहीं होगा। ऐसी स्थिति में इस टूर्नामेंट का आयोजन चेन्नई में भी हो सकता है। मेरे कहने का मतलब है कि उन दोनों के लिए परिस्थितियां एक जैसी होगी। उनके आसपास के सभी लोगों की प्रतिक्रिया बहुत भावनात्मक होगी।’ चेन्नई ने आखिरी बार 2013 में विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी की थी, जब आनंद का मुकाबला नॉर्वे के दिग्गज खिलाड़ी और वर्तमान में विश्व के नंबर एक मैग्नस कार्लसन से हुआ था।
इससे पहले 2000 में दिल्ली ने भी विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी की थी, जब आनंद ने स्पेन के एलेक्सी शिरोव का सामना किया था। भारत के पहले ग्रैंडमास्टर आनंद ने कहा कि गुकेश का किसी भी अन्य प्रतिद्वंद्वी के साथ मुकाबला भी दिलचस्प होगा, लेकिन उससे भावनात्मक पहलू नहीं जुड़ा होगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अमेरिकी खिलाड़ियों कारुआना और नाकामुरा भी क्वालीफाई करने के प्रबल दावेदार हैं। अगर उनमें से कोई क्वालीफाई करता है तो वह दिमागी खेल खेलने की कोशिश करेगा। साथ ही वे काफी उम्रदराज भी हैं। प्रज्ञानानंदा को छोड़कर कोई भी अन्य खिलाड़ी अगर क्वालीफाई करता है तो उसमें भावनात्मक पहलू नहीं जुड़ा होगा।’ विश्व चैंपियनशिप की तारीख और स्थान अभी तक घोषित नहीं किए गए हैं। आनंद से जब पूछा गया कि एक खिलाड़ी के रूप में आज तक उन्हें क्या प्रेरित करता है, तो उन्होंने कहा, ‘मैं खेलना चाहता हूं। मुझे प्रतिस्पर्धा करना पसंद है।
मैं चुनिंदा टूर्नामेंट में खेल रहा हूं। इससे मुझे काफी खाली समय भी मिल जाता है।’ इस दिग्गज खिलाड़ी ने कहा कि प्रज्ञानानंदा, गुकेश, आर वैशाली और अर्जुन एरिगैसी सहित जिन युवाओं को उन्होंने प्रशिक्षित किया है, उनके साथ उनका रिश्ता सम्मानजनक है, क्योंकि उनके बीच उम्र का बहुत बड़ा अंतर है। आनंद ने कहा, ‘यह मुझसे काफी छोटी पीढ़ी है। अक्सर मुझे अहसास होता है कि मैं उनके माता-पिता से भी बड़ा हूं। एक समय था जब मैं छह-सात साल पहले गुकेश, प्रज्ञानानंदा और अर्जुन से मिला था। तब मुझे अहसास हुआ कि उनकी संयुक्त आयु अभी मेरी उम्र के बराबर भी नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन फिर हमारा रिश्ता क्या है। क्या मैं उनसे बात करने वाला कोई दिग्गज खिलाड़ी हूं। तब तो बहुत दूरी का भाव हो जाता है। मैं शतरंज का खिलाड़ी हूं और उनके बिल्कुल बराबर हूं। मेरा मतलब है, अगर वे कोई अच्छी चाल सुझाते हैं, तो वह अच्छी चाल है। वहां सीनियर या जूनियर जैसा कोई भाव नहीं होता है।’