जालंधर : एक बॉल ब्वॉय के रूप में 2013 में शुरूआत करने से भारतीय पुरुष हॉकी टीम का उपकप्तान बनने तक हार्दिक सिंह ने कई उतार चढाव देखे हैं और उनका मानना है कि एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी का आयोजन भारतीय हॉकी की नर्सरी कहे जाने वाले पंजाब के लिये अच्छा तोहफा है। हॉकी इंडिया लीग के शुरूआती सत्र में 2013 में मोहाली में हार्दिक ने बॉल ब्वॉय के रूप में काम किया। तेरह साल बाद उनके नाम लगातार दो ओलंपिक कांस्य और लगातार दो एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक हैं। 28 वर्ष के हार्दिक ने कहा, ‘मैंने अपने कैरियर की शुरूआत मोहाली में की थी जहां एसीटी के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले जायेंगे। मैंने वहां कैरियर शुरू किया और तीन साल बाद सुरजीत सिंह अकादमी से जुड़कर भारत की जूनियर टीम में आया। हमारे पंजाब से कई अंतरराष्ट्रीय हॉकी दिग्गज और ओलंपिक पदक विजेता निकले हैं। पंजाब में अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी प्रदेश के लिये अच्छा तोहफा है। अगली पीढी जरूर इस टूर्नामेंट से प्रेरित होगी।’ हॉकी हार्दिक को विरासत में मिली है जिनके दादा प्रीतम सिंह भारतीय नौसेना के पूर्व हॉकी कोच रह चुके हैं। उनके मामा भारत के पूर्व ड्रैग फ्लिकर जुगराज सिंह उनके मेंटोर भी हैं। जालंधर और मोहाली में हो रही एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी के जरिये पंजाब में 17 साल बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी लौटी है। आखिरी बार यहां 2009 में गोल्ड कप अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला गया था।