नयी दिल्ली : पूर्व भारतीय दिग्गज हरभजन सिंह ने कहा है कि विश्वभर की प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने वाली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) जैसी T-20 लीग की बढ़ती लोकप्रियता के कारण द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के खत्म होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हरभजन ने एक साक्षात्कार में T-20 लीग की बढ़ती संख्या के कारण लगातार व्यस्त होते जा रहे क्रिकेट कैलेंडर को देखते हुए खेल के तीनों प्रारूपों के भविष्य के बारे में खुलकर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि उनकी आत्मकथा इस साल के अंत में प्रकाशित होगी। वह इस पर पिछले कुछ समय से काम कर रहे हैं।
हरभजन से जब पूछा गया कि क्या T-20 लीग आखिर में वह जगह ले लेंगी जो पारंपरिक रूप से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए रही है, तो उन्होंने कहा, ‘ऐसा पहले ही हो चुका है, 70 प्रतिशत लोग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बजाय क्लब क्रिकेट देख रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच को देखने के लिए पर्याप्त संख्या में दर्शक पहुंचते हैं लेकिन अगर भारत श्रीलंका या अफगानिस्तान से खेलता है तो बहुत कम दर्शक वह मैच देखते हैं। इसी तरह से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मैच में दर्शक संख्या अच्छी होती है लेकिन इंग्लैंड-बांग्लादेश सीरीज में ऐसा नहीं होता है।’ भारत और श्रीलंका के बीच शनिवार से दो टेस्ट मैच की सीरीज शुरू होगी।
वनडे में 236 मैचों में 269 विकेट लेने वाले हरभजन ने कहा, ‘अगर भारत-ऑस्ट्रेलिया, भारत-दक्षिण अफ्रीका या भारत-इंग्लैंड के बीच कोई सीरीज होती है, तो मैं उसे देखना पसंद करूंगा। मैं टेस्ट क्रिकेट देखने के लिए भुगतान करने के लिए भी तैयार हूं। मुझे वनडे में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैंने इसे देखा है, खेला है।’ हरभजन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में एक क्रिकेटर के कौशल और जज्बे की परीक्षा होती है और इसे खेल के चरम पर बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘टेस्ट क्रिकेट ही मुख्य क्रिकेट है। खेल से जुड़े सभी हितधारकों को टेस्ट क्रिकेट को बचाए रखना चाहिए और इसे बढ़ावा देना चाहिए। क्योंकि टेस्ट क्रिकेट ही सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट है। यह एक क्रिकेटर के तौर पर आपकी हर तरह से परीक्षा लेता है।’
भारत में बेहद लोकप्रिय IPL से लेकर ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग (BBL) और इंग्लैंड की द हंड्रेड तक, फ्रेंचाइजी क्रिकेट ने अपनी एक अलग पहचान बना ली है। दर्शकों ने भी इसको पूरा समर्थन दिया है। T-20 क्रिकेट के बढ़ते दबदबे ने वनडे अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया है। हरभजन ने कहा कि फ्रेंचाइजी आधारित लीग मैचों में खचाखच भरे स्टेडियम क्रिकेट प्रेमियों की पसंद में आए इस बदलाव को समझने के लिए पर्याप्त सबूत है। उन्होंने कहा, ‘आप ‘द हंड्रेड’ देख लीजिए, स्टेडियम खचाखच भरे होते हैं। BBL में भी स्टेडियम खचाखच भरे होते हैं। IPL में तो टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है।
पहले से ही ऐसी संस्कृति विकसित हो चुकी है कि IPL के दो महीने किसी उत्सव की तरह होते हैं। इसलिए यह बदलाव आया है जिसमें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पिछड़ गया है।’ लीग के व्यावसायिक रूप से भी अधिक शक्तिशाली होने के कारण हरभजन को नहीं लगता कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अपनी पुरानी प्रतिष्ठा फिर से हासिल कर पाएगा। पूर्व गेंदबाज ने कहा कि यह एक ऐसी प्रतियोगिता के लिए स्वाभाविक प्रगति थी जो प्रशंसकों को खेल और मनोरंजन का मिश्रण प्रदान करता है। उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को वापस पाना मुश्किल होगा क्योंकि लीग बहुत बड़ी हो गई हैं।
लीग में दर्शकों हर तरह की प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, इसलिए यह एक अलग ही नजारा होता है।’ हरभजन ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अधिक तवज्जो मिले क्योंकि वह इसका हकदार है। लेकिन IPL के इस दो महीने के दौरान बहुत से लोगों की दिलचस्पी उसी में होती है।’ उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि T-20 क्रिकेट के उदय ने खिलाड़ियों की मानसिकता के साथ-साथ दर्शकों की अपेक्षाओं को भी मौलिक रूप से बदल दिया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने अक्सर राष्ट्रीय टीम के लिए गुणवत्ता वाले खिलाड़ियों को बनाए रखने में आने वाली समस्याओं का जिक्र किया है, क्योंकि T-20 लीग में स्वतंत्र रूप से खेलने का विकल्प चुनने वाले खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
न्यूजीलैंड में भी केन विलियमसन और डेवोन कॉनवे जैसे शीर्ष खिलाड़ियों ने वैश्विक स्तर पर T-20 के अवसर तलाशने के लिए केंद्रीय अनुबंध ठुकरा दिया। हरभजन ने कहा, ‘T-20 के आने से हालात बदल गए हैं, बल्लेबाजों की मानसिकता बदल गई है, जनता की सोच बदल गई है। समय की कमी है, इसलिए लोग छोटा प्रारूप देखना चाहते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘टेस्ट क्रिकेट हाशिए पर चला गया है जबकि इसे शीर्ष स्तर पर होना चाहिए था।’