नयी दिल्ली : खेल मंत्रालय ने ग्लास्गो में इस सप्ताह शुरू हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों के लिये भारतीय खिलाड़ियों की तैयारियों पर 53.09 करोड़ रुपये खर्च किये हैं हालांकि भारत के प्रमुख खेलों के नहीं होने से पदकों की संख्या भले ही अधिक नहीं रहे लेकिन प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद जरूर है। 23 जुलाई से शुरू हो रहे इन खेलों में मेजबान द्वारा बजट में कटौती की वजह से दस खेल और छह पैरा खेलों को ही शामिल किया गया है। इसमें निशानेबाजी, हॉकी, कुश्ती, क्रिकेट और बैडमिंटन जैसे खेल नहीं हैं जिनमें भारत को अधिक पदक मिलते हैं। खेलमंत्री मनसुख मांडविया सोमवार की रात ग्लास्गो रवाना हो रहे हैं जहां भारतीय खिलाड़ियों और अधिकारियों से मिलकर उनका उत्साहवर्धन करेंगे।
भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों का मेजबान होने के नाते समापन समारोह में इन खेलों की मेजबानी लेगा। मांडविया पहले ही कह चुके हैं कि भारत में होने वाले खेलों में उन सभी खेलों को रोस्टर में जगह मिलेगी जिनमें पारंपरिक रूप से भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता भालाफेंक स्टार नीरज चोपड़ा की अगुवाई में भारत का 32 सदस्यीय एथलेटिक्स दल इन खेलों में भाग लेगा जिसकी तैयारी पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। इनमें अमेरिका के कोलाराडो में ऊंचाई पर स्थित केंद्र पर प्रशिक्षण, स्विटरलैंड, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका में अभ्यास शामिल है। मुक्केबाजी में भारत के 14 खिलाड़ी (सात पुरुष और सात महिला) इन खेलों में भाग लेंगे जिनकी तैयारी पर दस करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये गए हैं।
मुक्केबाजों ने आयरलैंड के बेलफास्ट में अभ्यास शिविर में भाग लिया है। इन खेलों में भारतीय चुनौती की अगुवाई ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन करेंगी। जिम्नास्टिक में प्रणति नासक और प्रोशिता सामंता भारत की चुनौती पेश करेंगी जिन्होंने ब्रिटेन में अभ्यास किया है। इनकी तैयारी पर करीब 30 लाख रुपये खर्च किये गए हैं। भारोत्तोलन में ओलंपिक रजत पदक विजेता और लवलीना के साथ भारत की ध्वजवाहक मीराबाई चानू पर नजरें रहेंगी। भारत के 12 खिलाड़ी ग्लास्गो खेलों में चुनौती पेश करेंगे जिन्होंने बर्मिंघम स्थित वारले वेटलिफ्टिंग क्लब में अभ्यास किया और इनकी तैयारियों पर करीब साढे सात करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 28 पैरा खिलाड़ी भी पांच स्पर्धाओं में भाग लेंगे जिनकी तैयारी पर पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये गए हैं। मांडविया ने कहा, ‘हमने भारत की सभी पदक उम्मीदों को तैयारियों के लिये यूरोप भेजा ताकि उन्हें ग्लास्गो के स्थानीय हालात और टाइम जोन में ढलने में आसानी हो।’ भारतीय दल से कितने पदकों की उम्मीद है, यह पूछने पर टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) के सीईओ एन एस जोहल ने कहा, ‘चूंकि इस बार कई खेल राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा नहीं है तो पदक संख्या के बारे में नहीं कहा जा सकता लेकिन जितने भी खेलों में भारतीय खिलाड़ी भाग ले रहे हैं, उनमें प्रदर्शन पहले से बेहतर जरूर रहेगा।’