कुछ पारियां सिर्फ रन नहीं बनातीं, बल्कि खिलाड़ी के धैर्य, मेहनत और खुद पर भरोसे की कहानी भी कहती हैं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे में ऐसी ही पारी खेली। करीब नौ साल पांच महीने से अपने अगले वनडे शतक का इंतजार कर रहीं दीप्ति ने रविवार को 86 गेंदों पर नाबाद 106 रन बनाकर इस इंतजार को खत्म किया। उनकी पारी ने भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने ऐसा रिकॉर्ड भी बनाया, जो भारतीय महिला क्रिकेट में पहले किसी बल्लेबाज के नाम नहीं था।
दीप्ति ने इससे पहले अपना पहला वनडे शतक मई 2017 में आयरलैंड के खिलाफ लगाया था। उस मुकाबले में उन्होंने 160 गेंदों पर 188 रन की शानदार पारी खेली थी। उसके बाद दूसरा शतक लगाने के लिए उन्हें नौ साल और पांच महीने का इंतजार करना पड़ा। दोनों शतकों के बीच कुल 3,450 दिनों का अंतर रहा।
लंबे समय तक दूसरे शतक का इंतजार करने के बावजूद दीप्ति ने अपना भरोसा नहीं खोया। मैच के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने इसके लिए लगातार कोशिश की, लेकिन उन्हें पता था कि मेहनत जारी रखने पर एक दिन यह उपलब्धि जरूर हासिल होगी। उनके लिए शतक तक पहुंचना खास था, लेकिन पारी के दौरान उनका ध्यान केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड पर नहीं था। वह टीम के लिए साझेदारी बनाने और भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाने पर ध्यान दे रही थीं।
दीप्ति के इस शतक की खास बात उनका बल्लेबाजी क्रम भी रहा। वह छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं और नाबाद 106 रन बनाए। इसके साथ ही वह वनडे क्रिकेट में छठे या उससे निचले क्रम पर शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला बल्लेबाज बन गईं।
दीप्ति ने 86 गेंदों की पारी में 15 चौके लगाए। उन्होंने जरूरत के मुताबिक आक्रामक रुख अपनाया और स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ स्वीप शॉट का अच्छा इस्तेमाल किया। उनकी बल्लेबाजी में धैर्य और तेजी का संतुलन दिखा। जब भारत को बड़े स्कोर तक पहुंचने के लिए मजबूत साझेदारी की जरूरत थी, तब उन्होंने जिम्मेदारी संभाली।
यह पारी इसलिए भी अहम रही क्योंकि दीप्ति की पहचान एक ऐसी ऑलराउंडर के रूप में है, जो गेंद और बल्ले दोनों से टीम के लिए योगदान देती हैं। इस बार उनके बल्ले ने भारत की जीत की नींव मजबूत की।
मुकाबले में भारत की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। शुरुआती विकेट गिरने के बाद टीम को ऐसी साझेदारी की जरूरत थी, जो पारी को संभालने के साथ रन गति भी बढ़ाए। पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने यही काम किया। दोनों ने मिलकर 153 रन जोड़े और भारतीय पारी को नई दिशा दी। हरमनप्रीत ने 121 गेंदों पर 126 रन बनाए, जबकि दीप्ति ने नाबाद 106 रन का योगदान दिया। दोनों के शतकों की बदौलत भारत ने 50 ओवर में छह विकेट पर 328 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। हरमनप्रीत की पारी में अनुभव और आक्रामकता नजर आई, जबकि दीप्ति ने परिस्थिति के अनुसार अपनी बल्लेबाजी को आगे बढ़ाया। इस साझेदारी ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया और भारत को मुकाबले में मजबूत बढ़त दिलाई।
328 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम ने संघर्ष किया, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने उसे खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पूरी टीम 207 रन पर सिमट गई। भारत ने यह मुकाबला 121 रन से जीतकर तीन मैचों की वनडे श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। दीप्ति ने बल्लेबाजी में शतक लगाने के बाद गेंद से भी योगदान दिया और तीन विकेट लेकर जिम्बाब्वे की पारी समेटने में मदद की। इस तरह उनका प्रदर्शन एक विभाग तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने साबित किया कि टीम को मुश्किल परिस्थिति से निकालने में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
दीप्ति ने जिम्बाब्वे की टीम की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि विपक्षी टीम को कमजोर नहीं माना जा सकता और उसने मुकाबले में संघर्ष किया। भारतीय टीम ने अपनी गेंदबाजी और सामूहिक प्रदर्शन के दम पर जीत हासिल की।
दीप्ति शर्मा का यह शतक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह उस निरंतरता और धैर्य की कहानी भी है, जिसकी जरूरत लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में पड़ती है। पहला शतक लगाने के बाद दूसरा शतक आने में भले ही लंबा समय लगा, लेकिन दीप्ति ने टीम की जरूरत के अनुसार खेलना जारी रखा। उनकी इस पारी ने भारत को श्रृंखला में निर्णायक बढ़त दिलाई और महिला वनडे क्रिकेट में एक नया भारतीय रिकॉर्ड भी जोड़ा। अब टीम की नजर 28 अक्टूबर को होने वाले तीसरे मुकाबले पर होगी, जहां भारत श्रृंखला का समापन जीत के साथ करना चाहेगा।