नयी दिल्ली : भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच शोर्ड मारिन ने चीन के खिलाफ एशियाई खेल फाइनल से पहले टीम को स्पष्ट संदेश दिया था कि एक शेर के गुणों को आत्मसात करके मैदान पर उतरना है और नतीजा खुद ब खुद मिलेगा। भारतीय महिला टीम ने गत चैम्पियन और ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को 1 . 0 से हराकर एशियाई खेलों में 44 साल में पहली बार स्वर्ण पदक जीता। मारिन ने ऐतिहासिक जीत के बाद भाषा को दिये विशेष इंटरव्यू में कहा, ‘मैने भारतीय शेरों का उदाहरण दिया । शेर की आंख, प्रतीक और वह पत्थर जो मैने लड़कियों को दिया था । मैने उनसे कहा कि जैसे शेर शिकार करता है, एकाग्र होकर शिकार को देखता है और कैसे झटके से उबरकर फिर वापसी करता है।
भारत में शेर सबसे बड़ा प्रतीक है । मैने मैच से पहले उनसे यही सब कहा।’ एशियाई खेलों में वह पदक जीतकर ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने के इरादे से ही आये थे और उन्हें यकीन था कि टीम ऐसा कर सकेगी। उन्होंने कहा,‘पिछले महीने विश्व कप के दौरान पूरे समय मुझे यह भरोसा था । हमने चीन को पहले मैच में ड्रॉ पर रोका और पहली बार बड़े टूर्नामेंट में हम ऊंची रैंकिंग वाली टीम के खिलाफ खेल रहे थे। वहां टीम का प्रदर्शन देखकर मुझे विश्वास जगा था कि हम एशियाई खेलों में स्वर्ण जीत सकते हैं।’ मारिन ने कहा,‘हमने एफआईएच नेशंस कप में अच्छा प्रदर्शन किया था और विश्व कप क्वालीफायर में भी लेकिन वह अलग था । विश्व कप में बेहतर टीमें थी और वही मुझे लगा कि हम एशियाई खेलों में स्वर्ण जीत सकते हैं।’
उन्होंने कहा,‘और सबसे अहम बात यह है कि मुझे ही ऐसा नहीं लगा, बल्कि टीम को भी यह महसूस हुआ।’ इस स्वर्ण पदक से पूरे भारत में जश्न का माहौल है और एक बार फिर महिला हॉकी ने सभी का ध्यान खींचा है। कोच ने कहा,‘मैं अतीत के बारे में नहीं सोच रहा था और यह भी नहीं कि इस जीत के मेरे लिये क्या मायने हैं। मुझे यह अच्छा लग रहा है कि इस जीत ने भारत के लोगों को कितनी खुशी दी है । वे कितने उत्साहित और भावुक हैं और कितने बच्चों को इससे प्रेरणा मिलेगी।’ टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम को ऐतिहासिक चौथे स्थान तक ले जाने वाले कोच ने कहा, ‘हम सभी टीम को खुलकर खेलने का मौका देते हैं , दबाव नहीं डालते और साथ में मनोरंजन भी करते हैं ।
बहुत सारी चीजों को मिलाकर यह उपलब्धि हासिल हुई है। सिर्फ एक चीज नहीं है।’ हॉकी पिच से इतर भी मारिन का भारत से जुड़ाव ऐसा हो गया है कि वह इस देश को अपना दूसरा घर मानते हैं । बेंगलुरू में बाइक राइड से लेकर फिल्टर कॉफी तक और हिन्दी के कुछ शब्द सीखने तक। उन्होंने कहा, ‘मैं भारत से करीब से जुड़ गया हूं । लोग हमारी कितनी हौसलाअफजाई करते हैं । सोशल मीडिया पर अच्छे कमेंट आते हैं और कितना सम्मान मिलता है । मैं इससे अभिभूत हूं।’ टोक्यो ओलंपिक, विश्व कप और एशियाई खेलों में से अपना पसंदीदा पल चुनना मारिन के लिये मुश्किल है लेकिन उन्होंने कहा, ‘ओलंपिक खास था, कोविड की वजह से। मैं डेढ साल तक घर नहीं जा सका लेकिन इस साल विश्व कप और एशियाई खेल भी मेरे शीर्ष तीन अनुभव में से हैं।’