मंगोलिया : भारतीय मुक्केबाज सोमवार से यहां शुरू हो रही एशियाई चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करके आगामी व्यस्त सत्र में हर मौके का पूरा फायदा उठाकर साल के आखिर में होने वाले बहु खेल टूर्नामेंटों के लिये सीधे कोटा हासिल करने की कोशिश करेंगे। इस टूर्नामेंट के जरिये नये व्यस्त सत्र की शुरुआत होगी जिसमें जुलाई अगस्त में ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेल, सितंबर-अक्टूबर में जापान में एशियाई खेल और उजबेकिस्तान में विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स होने हैं। इस चैंपियनशिप के जरिये मुक्केबाजों को राष्ट्रमंडल खेलेां और एशियाई खेलों के लिये सीधे क्वालीफाई करने का मौका मिलेगा।
भारतीय टीम पिछले 15 दिन से मंगोलिया में है और मंगोलिया, चीन, जोर्डन, थाईलैंड के मुक्केबाजों के साथ अभ्यास कर रही है। महिला वर्ग में भारतीय चुनौती की अगुवाई ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो ), दो बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन (51 किलो), मौजूदा विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा (48 किलो) और जैसमीन लंबोरिया (57 किलो) करेंगी। लवलीना ने फरवरी में स्पेन में बॉक्सेम इंटरनेशनल जीता था। वहीं निकहत, मीनाक्षी और जैसमीन नवंबर के बाद पहला टूर्नामेंट खेलेंगी। भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच सैंटियागो नीवा ने कहा, ‘एशियाई चैंपियनशिप कठिन परीक्षा होगी।
हमें पता है कि पिछले एक दशक में एशियाई मुक्केबाजी का स्तर काफी बेहतर हुआ है और दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से कई एशिया से हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा इतिहास बताता है कि हम पदक जीत सकते हैं। हमारी नजरें कई पदकों पर है जिसके लिये हमारे मुक्केबाजों का फाइनल में पहुंचना जरूरी है।’ भारतीय पुरुष टीम पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में मिली नाकामी का गम दूर करना चाहेगी जहां 12 साल में पहली बार एक भी भारतीय पुरुष मुक्केबाज पदक नहीं जीत सका था। भारत के कोचिंग ढांचे में भी बदलाव हुआ है और तीसरी बार सी ए कुटप्पा मुख्य कोच के रूप में लौटे हैं। भारतीय पुरुष टीम की उम्मीदों का दारोमदार विश्व कप पदक विजेता जादूमणि सिंह (55 किलो) और सचिन सिवाच (60 किलो) पर रहेगा।