नयी दिल्ली : खेल मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि एक साल पहले घोषित चयन मानदंडों पर खरे नहीं उतरने वाले खिलाड़ियों को उनके समर्थकों की ओर से बनाए जा रहे ‘दबाव’ के बावजूद एशियाई खेलों के लिए चुनी गयी भारतीय टीम में जगह नहीं दी जाएगी। खेल मंत्रालय ने 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए 492 खिलाड़ियों के दल को मंजूरी दी है। इनमें एथलेटिक्स के 73 खिलाड़ी शामिल हैं, जो दल का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। दल में कुछ और खिलाड़ियों को शामिल किए जाने की संभावना है लेकिन ये ऐसे मामले हैं जिनके लिए एशिया ओलंपिक परिषद की मंजूरी का इंतजार है।
मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इन अतिरिक्त खिलाड़ियों का चयन पिछले साल सितंबर में जारी किये गये मानदंडों की अनदेखी करके नहीं किया जाएगा। खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, ‘हम पर काफी दबाव था। कुछ अभिभावक आए और उन्होंने कहा कि उनके बच्चे का चयन नहीं हुआ है। हमने उनसे कहा कि अगर आपका बच्चा चयन का हकदार है और तय मानदंड पूरा करता है, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि उसका चयन न हो।’ अधिकारी ने उदाहरण देते हुए कहा, ‘मान लीजिए 100 मीटर दौड़ में पदक की दावेदारी के लिए 10 सेकेंड का समय जरूरी है, तो क्या हम 15 सेकेंड में दौड़ने वाले खिलाड़ी को भेजेंगे?
हमने मानदंड तय किए हैं कि अगर कोई खिलाड़ी एशिया में शीर्ष छह में है, तभी उसका चयन किया जाएगा। हमने इसी नियम का पालन किया है।’ मंत्रालय ने 2025 में जारी चयन मानदंडों में स्पष्ट किया था कि एशियाई खेलों समेत बहु-खेल प्रतियोगिताओं के लिए केवल उन्हीं खिलाड़ियों पर विचार किया जाएगा, जिनके पास पदक जीतने की ‘वास्तविक संभावना’ हो।इसके अलावा महाद्वीपीय रैंकिंग में शीर्ष छह खिलाड़ियों को ही पात्र माना गया था। इसी कटऑफ के कारण खराब होती रैंकिंग के चलते भारतीय फुटबॉल टीम एशियाई खेलों से बाहर होने वाली शुरुआती टीमों में शामिल रही।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी कुछ सप्ताह पहले कहा था कि एशियाई खेल जैसी प्रतियोगिताओं को खिलाड़ियों के लिए महज अनुभव हासिल करने के अवसर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। जापान वही खिलाड़ी जाएं, जो पदक जीतने की मजबूत क्षमता रखते हों। बहु-खेल प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय दल को अंतिम रूप देना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। चयन से बाहर किए गए खिलाड़ी कई बार अदालत में चुनौती भी दे चुके हैं। हाल में घुड़सवार खिलाड़ी अनुष अग्रवाला ने एशियाई खेलों के लिए चयन नहीं होने के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अंततः उच्चतम न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
अखिल भारतीय टेनिस संघ (AITA) की ओर से मूल रूप से चुनी गई टीम से पांच खिलाड़ियों को बाहर किए जाने के बाद पिछले कुछ दिनों में नया विवाद खड़ा हो गया है। टीम में सुमित नागल एकमात्र पुरुष एकल खिलाड़ी हैं, जबकि भारत की नंबर एक महिला खिलाड़ी सहज यमलापल्ली समेत अनुशंसित महिला खिलाड़ियों के नाम दल से हटा दिए गए हैं। यमलापल्ली की डब्ल्यूटीए रैंकिंग में 344वीं स्थिति है। इस फैसले की एआईटीए और रोहन बोपन्ना समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने कड़ी आलोचना की है। मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ‘शुरुआत से हमारा उद्देश्य छोटा लेकिन प्रभावी दल भेजना था। चयन मानदंड एक साल पहले ही घोषित कर दिए गए थे। सभी खिलाड़ियों के पास इन मानदंडों को समझने और उनके अनुरूप खुद को तैयार करने के लिए पर्याप्त समय था।’