खेल

तीरंदाज शीतल ने पायल की तारीफ की

ओडिशा की बिना हाथ और पैर वाली 18 साल की पायल नाग ने बैंकॉक में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में जब दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीता तो शीतल का यह एहसास बदल गया

कोलकाता : पहली भुजाहीन विश्व चैंपियन तीरंदाज बनने के साथ कई उपलब्धियां हासिल करने वाली शीतल देवी का कहना है कि वह अधिकतर पोडियम पर ‘अकेलापन’ महसूस करती हैं। हालांकि ओडिशा की बिना हाथ और पैर वाली 18 साल की पायल नाग ने बैंकॉक में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में जब दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीता तो शीतल का यह एहसास बदल गया। वर्ष 2023 में कटरा में माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड खेल परिसर में शीतल को देखकर सीखने वाली पायल ने चार अप्रैल को अपने दूसरे ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में अपनी सीनियर खिलाड़ी को 139-136 से हराकर महिलाओं का कंपाउंड खिताब जीता। भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित वर्चुअल मीडिया बातचीत के दौरान शीतल ने कहा, ‘पहले ऐसा लगता था कि मैं यहां पर अकेले पदक जीत रही हूं, बहुत अच्छी बात है कि वह आई है।’

यह नतीजा तो शानदार था लेकिन इसके बाद बैंकॉक तीरंदाजी केंद्र में जो हुआ वह दिल को छूने वाला था। पदक वितरण समारोह के दौरान शीतल को पायल को राष्ट्रीय ध्वज की ओर मुड़ने में मदद करते हुए देखा गया। शीतल ने अपने पैरों का इस्तेमाल करके पायल की व्हीलचेयर के ‘फुटरेस्ट’ को धीरे से सही किया जिससे कि टीम की उनकी जूनियर साथी तिरंगे की तरफ देख सके और राष्ट्रगान स्टेडियम में गूंज सके। तब तक शीतल भारत की सबसे मशहूर पैरा तीरंदाज थीं। लेकिन बैंकॉक में सभी की नजरें सबकी नजरें बालांगीर की किशोरी पायल पर थीं जिन्हें शीतल देवी के बचपन के कोच कुलदीप वेदवान की पारखी नजरों ने ढूंढा और ट्रेनिंग दी। शीतल का मानना है कि यह प्रतिद्वंद्विता नहीं बल्कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है और इससे इस साल एशियाई खेलों और 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालंपिक खेलों में पदक की पदक की संभावनाओं में इजाफा ही होगा।

शीतल ने कहा, ‘हार और जीत खेल का हिस्सा है। मैंने खराब प्रदर्शन किया लेकिन उसका प्रदर्शन बेहतर था। कुल मिलाकर यह गौरवपूर्ण लम्हा था क्योंकि दोनों पदक (स्वर्ण और रजत पदक) भारत के पास आए। यह गौरव की बात है कि भारत तीरंदाजी में दबदबा बना रहा है और इतने सारे पदक जीत रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा दोनों में जीत दर्ज की। यह गौरव की बात है कि इतने सारे उभरते हुए तीरंदाज सामने आ रहे हैं। उम्मीद करती हूं कि हम एशियाई खेलों में और अधिक पदक जीतेंगे।’ यह पूछने पर कि क्या पायल उनमे दबाव में रखती है, शीतल ने कहा, ‘हार से सीख मिलती है। ऐसा नहीं है कि वह मेरे ऊपर दबाव बनाती है या मैं उसके ऊपर। हम दबाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘उसे अपने खेल पर थोड़ा और काम करना होगा।

वह इतना अच्छा कर रही है, इससे मैं काफी खुश हूं। वह और अधिक पदक जीत सकती है। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकती हूं और नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदल सकती हूं।’ पायल की यात्रा असाधारण रही है। वर्ष 2015 में तीसरी कक्षा की छात्रा पायल रायपुर में एक निर्माणाधीन इमारत की छत पर अपने भाई के साथ खेलते हुए उन्हें करंट लग गया था। इस इमारत में उनके पिता राजमिस्त्री के रूप में काम कर रहे थे। बिजली के झटके से वह गंभीर रूप से घायल हो गई और डॉक्टरों के पास उनकी जान बचाने के लिए उसके चारों हाथ-पैर काटने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। वर्षों बाद 2023 में कोच वेदवान ने उसे सोशल मीडिया पर एक तस्वीर के जरिए देखा। वह उसे एक अनाथालय से लाए और उसे अपनी देखरेख में रखा। उसके लिए खास उपकरण डिजाइन किया जिससे कि वह शीतल के साथ ट्रेनिंग ले सके जो फोकोमेलिया नाम की एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी की वजह से बिना हाथ के पैदा हुई थी।  

SCROLL FOR NEXT