नयी दिल्ली : भारतीय ड्रेसेज घुड़सवार अनुष अगरवाला ने 2026 एशियाई खेलों के लिए भारत की ड्रेसेज टीम से बाहर किए जाने को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। विवाद इस बात पर है कि चयन के नियमों का मतलब कैसे निकाला जाए और क्या अंतिम मेरिट सूची बनाते समय अगरवाला के कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के स्कोर को गिना जाना चाहिए था। यह विवाद अगरवाला के दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं जर्मनी में सीडीआई हेगन (22-26 अप्रैल) और बेल्जियम में सीडीआई लियर (20-24 मई) में हासिल किए गए स्कोर को कैसे गिना जाए इस पर केंद्रित है।
भारतीय घड़सवारी महासंघ (EFI) की तदर्थ समिति का कहना है कि उन स्कोर को उस तरह से नहीं गिना जा सकता जैसा अगरवाला चाहते थे क्योंकि वे चयन के नियमों के मुताबिक नहीं थे। दूसरी ओर अगरवाला ने अदालत में इस व्याख्या को चुनौती दी है। एशियाई खेलों की टीम में चयन के लिए राइडर्स को तय चयन ट्रायल में हिस्सा लेना था और जरूरी स्तर हासिल करने थे। EFI के मुताबिक एक मुख्य शर्त यह थी कि राइडर्स को कम से कम सात दिन पहले यह बताना था कि वे किन प्रतियोगिताओं या टेस्ट को आधिकारिक चयन ट्रायल के तौर पर लेना चाहते हैं।
जिन प्रतियोगिताओं या टेस्ट के बारे में ठीक से जानकारी नहीं दी गई थी उन्हें विचार से बाहर किया जा सकता था। यही ‘सात दिन पहले जानकारी देने का नियम’ विवाद की मुख्य वजह है। अगरवाला ने 15 अप्रैल को EFI को ईमेल करके बताया कि सीडीआई हेगन में होने वाला सिर्फ ‘इंटर-एक’ टेस्ट ही उनके तीसरे एशियाई खेलों के ट्रायल के तौर पर गिना जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि वे बाद में लियर में पीएसजी और ‘इंटर-एक’ फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भी हिस्सा लेना चाहते हैं। उन्होंने 18 अप्रैल को एक नया अनुरोध किया जिसमें कहा गया कि हेगन में होने वाले पीएसजी और ‘इंटर-एक’ दोनों स्पर्धाओं को उनके तीसरे क्वालीफायर का हिस्सा माना जाए। EFI का कहना है कि यह नया अनुरोध सात दिन की समय-सीमा खत्म होने के बाद आया था इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।