सिलीगुड़ी

दुधिया में पुल फिर बहा, सिलीगुड़ी-मिरिक का सफर थमा।

बालासन के बढ़े बहाव में ह्यूम पाइप कॉजवे फिर बहा, भारी वाहनों की आवाजाही बंद; बेली ब्रिज पर सीमित क्षमता के साथ टिका सिलीगुड़ी-मिरिक संपर्क।

Khodija Khatun (Rabia)

दुधिया में स्थायी पुल का निर्माण पहले से चल रहा है। जुलाई में सरकार की ओर से इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था। तब तक सिलीगुड़ी-मिरिक मार्ग की निर्भरता अस्थायी व्यवस्था पर ही बनी रहेगी।

सिलीगुड़ी :

दुधिया में बारिश का मतलब सिर्फ पानी नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी-मिरिक की सड़क पर फिर संकट की आहट है। लगातार बारिश के बाद बालासन नदी का बहाव बढ़ा और दुधिया का ह्यूम पाइप कॉजवे एक बार फिर पानी की तेज धार में बह गया। इसके साथ ही सिलीगुड़ी-मिरिक मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। स्थानीय लोगों, पर्यटकों और मालवाहक वाहनों के लिए यह रास्ता बेहद अहम है। फिलहाल बेली ब्रिज से सीमित क्षमता के साथ हल्के वाहनों की आवाजाही हो रही है, जबकि भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्ते से भेजा जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब बालासन ने दुधिया की सड़क व्यवस्था को झटका दिया हो। 19 जून को भी लगातार बारिश के बाद बालासन का जलस्तर बढ़ा था और ह्यूम पाइप कॉजवे बह गया था। इसके बाद सिलीगुड़ी-मिरिक का सीधा सड़क संपर्क बाधित हो गया। लोगों की परेशानी को देखते हुए सेना ने पहले 34 मीटर लंबा अस्थायी फुटब्रिज तैयार किया। इसके बाद सेना और पीडब्ल्यूडी के सहयोग से करीब 58 मीटर लंबा बेली ब्रिज बनाया गया। जुलाई की शुरुआत में इसके चालू होने के बाद वाहनों की आवाजाही फिर शुरू हुई।

बेली ब्रिज की क्षमता सीमित है। करीब 9 टन भार क्षमता वाले इस पुल पर नियंत्रित तरीके से आवाजाही होती है। इसलिए ह्यूम पाइप कॉजवे का दोबारा बहना सीधे तौर पर मालवाहक परिवहन को प्रभावित करता है। सितंबर के पहले सप्ताह में भी तेज बारिश के बाद इसी कॉजवे को बालासन का तेज बहाव नुकसान पहुंचा चुका है।

स्थायी पुल ही स्थायी राहत

दुधिया में स्थायी पुल का निर्माण पहले से चल रहा है। जुलाई में सरकार की ओर से इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था। तब तक सिलीगुड़ी-मिरिक मार्ग की निर्भरता अस्थायी व्यवस्था पर ही बनी रहेगी।

अब मौसम ने फिर करवट ली है। बालासन का बढ़ता बहाव और ह्यूम पाइप कॉजवे का बहना स्थानीय लोगों को वही पुरानी चिंता लौटा रहा है—बारिश बढ़ी तो अगला संकट कितना बड़ा होगा?

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