महानंदा नदी  
सिलीगुड़ी

पोराझार निवासियों से किए वादे को क्या मेयर गौतम देब पूरा करेंगे

सिलीगुड़ी: बीते 4 अक्टूबर को उत्तर बंगाल में आई बाढ़ के कारण कई लोग बेघर हो गए, भारी मात्रा में जान-माल की हानि हुई | सिलीगुड़ी के निकटतम एसजेडीए अंतर्गत पोराझार इलाका भी महानंदा नदी में आए बाढ़ के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ था | इस आपदा के लगभग डेढ़ महीने बीत चुके है | अब धीरे धरे सब सामान्य होने लगा है लेकिन फिर भी लोग उस रात को नहीं भूले है | जानकारी अनुसार उस रात बाढ़ में पोराझार के लगभग 2000 से ज्यादा घरों के अंदर पानी घुस गया था | तो सैकड़ो घर क्षतिग्रस्त हुए और सैकड़ों मवेशी बह गए | वहीं लोगों ने काफी मशक्कत कर खुदको और अपने परिवार वालों को बचाया था | पीड़ितों ने यह भी कहा कि, वे नदी के किनारे बसे है और समय समय पर महानंदा नदी अपना रास्ता बदलता रहता है | नदी का तटबंध नदी से लगभग एक से डेढ़ किलो मीटर की दूरी पर है और इसी तटबंध के टूटने से कई गांवों में पानी घुस गया जिससे निचले हिस्से में घुसे पानी का दबाव कम हो गया और पानी का दबाव कम होने से ही लोगों की जान बच पाई है, वरना इस बाढ़ में सैकड़ों लोग मारे जाते।

बाढ़ पीड़ितों ने बताया किसी तरह बाढ़ से बच तो गए लेकिन जहां उन्होंने आश्रय लिया हुआ था वहां भी वे लगभग 6 से 7 घंटे तक बाढ़ के पानी के अंदर ही डूबे हुए थे जिसके कारण बच्चों की हालत बुरी तरह खराब हो गई थी और वे कई दिनों तक बीमार पड़ गए |

उस दौरान विभिन्न संगठन और प्रशासन की ओर से राहत कार्य शुरू किया गया था | लेकिन कई लोग राहत कार्य से वंचित रह गए है | उन्हें खाने के अलावा किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिली |

लेकिन राहत कार्य से वंचित लोगों ने मांग की है कि उन्हें किसी प्रकार की राहत सामग्री या सहयोग नहीं चाहिए | वे खुद कमा कर अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर सकते हैं

65 वर्षीय संतोष रॉय ने बहादुरी का परिचय देते हुए 4 अक्टूबर की रात को उस स्थिति में भी कई लोगों की जान बचाई और लगभग खुद बाढ़ के पानी में 6 से 7 घंटे खड़े रहे | इनका घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है शौचालय नष्ट होने के कारण अब उन्हें नदी किनारे स्वच्छ करने जाना पड़ता है | उन्होंने सरकार से नदी में बांध बनाने की गुहार लगाई है |

आशा दास जो लगभग 8 सालों से यहां पर रह रही है | इनका और उनकी मां का घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गया | बच्चों की किताबे नदी में बह गई | उस रात बच्चों को लेकर है वो और उनके पति बड़ी मुश्किल से जान बचाकर तो निकले | लेकिन उनका बेटा उस बाढ़ में खो गया बढ़ी मशक्कत के बाद उनका बेटा उन्हें मिला | उन्होंने बच्चों की किताबे और नदी किनारे बांध की मांग की है |

लक्खी साहा का घर नदी के किनारे है | जब बाढ़ की स्थिति बनी तो यह लोग गहरी नींद में सो रहे थे और बाढ़ में घर के सामान तो बह ही गए और घर को भी काफी नुकसान हुआ है | उन्हें अभी तक किसी प्रकार की सहूलियत नहीं मिली है | वे काम कर अपने परिवार को चला सकती है लेकिन नदी किनारे घर होने के कारण हमेशा बाढ़ का भय बना रहता है |

सपन बर्मन जिनके आंगन के कुछ दूरी से ही नदी की शुरुआत होती है | 4 अक्टूबर भयावा बाढ़ में वे किसी तरह अपने वृद्ध पिता को बचाकर निकल पाए और उनके कई मवेशी नदी की तेज बहाव में बह गए है अभी तक इन्हें भी किसी प्रकार की मदद या राहत सामग्री नहीं मिली है | वे किसी तरह अपना गुजर बसर कर रहे है लेकिन उन्होंने भी नदी किनारे बांध की मांग की है |

ज्योतिष बर्मन एक वृद्ध व्यक्ति है जो अपनी पत्नी के साथ खेती कर अपना गुजारा करते हैं | बाढ़ में उनके खेत बुरी तरह नष्ट हो गए और घर नदी में समा गया | बाढ़ के बाद तिनका तिनका जोड़कर इन्होंने सर छुपाने की व्यवस्था तो की, उन्हें किसी प्रकार की राहत सामग्री नहीं मिली | उन्होंने फिर से खेती करनी शुरू कर दी है वे भी चाहते है नदी किनारे बांध बने |

शीला महंतो मवेशियों के सहारे ही गुजर बसर करती है इनकी लगभग 17 बकरियां उस रात बाढ़ के तेज बहाव में बह गए | उनका कहना है कि पानी लगभग 6 फीट ऊपर आ चुका था वे और उनके परिवार किसी तरह बचकर भागने में कामयाब हो गए बर्तन, सामान, मोबाइल फोन सब कुछ बह गया | अब दोबारा इस तरह की स्तिथि न हो इसलिए नदी किनारे बांध बनाना जरुरी बन गया है |

फुलबाड़ी एक नंबर अंचल पोराझार पंचायत राजू मंडल से जब इस विषय को लेकर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा , कई ऐसे परिवार है जिन्हें अभी भी राहत सामग्री नहीं मिल पाई है विभिन्न संगठन के लोग तो आते है लेकिन सही जानकारी न होने के कारण कई लोगों को राहत सामग्री नहीं मिली है | सरकार की ओर से जो भी मिलना था वो दे दिया गया है लेकिन लोग बांध की मांग कर रहे है | इस आपदा के बाद मेयर गौतम देब,डिप्टी मेयर रंजन सरकार, डीएम, एसजेडीए अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा किया था | मेयर गौतम देब ने बांध को लेकरआश्वासन देते हुए मुख्यमंत्री से अपील करने के बात भी कही है और बहुत जल्द बांध को लेकर आगे के कार्य किए जाएंगे | साथ ही उन्होंने समाज सेवी संगठनों से अपील की है कि बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरण करते समय उनसे संपर्क करे, ताकि कोई भी पीड़ित राहत कार्य से वंचित न रहें |

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