प्रदर्शनी के लिए तैयार प्रतिनिधि  
सिलीगुड़ी

'वाइल्डलाइफ फ्रेंडली टी’ दिल्ली के लिए रवाना

जलपाईगुड़ी: गोरुमारा और रामसाई के जंगलों से सटे इलाकों में रहने वाले छोटे चाय किसान रोजाना हाथी, तेंदुआ, गैंडा और बाइसन जैसे वन्यजीवों के बीच रहकर चाय की खेती करते हैं। इन्हीं चुनौतियों के बीच रामसाई की महिला चाय किसान दीप्ति राय और अन्य किसानों ने खास किस्म की हैंडमेड चाय तैयार की है, जो अब दिल्ली के बाजार तक पहुंचने जा रही है। प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए इस चाय को ‘वाइल्डलाइफ फ्रेंडली टी’ नाम दिया गया है। इसकी पैकेजिंग पर चाय बागान, हाथी और तेंदुए की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं। टी बोर्ड के सहयोग से 16 और 17 अगस्त को दिल्ली के साकेत स्थित डीएलएफ मॉल में ‘हैंडक्राफ्टेड एक्सोटिक हाई-वैल्यू टी’ प्रदर्शनी आयोजित होगी। देशभर से चुने गए 30 छोटे चाय किसानों में उत्तर बंगाल के 6 किसान शामिल हैं, जिनमें जलपाईगुड़ी के 4 और दार्जिलिंग के 2 किसान हैं। जिला लघु चाय उत्पादक संघ के ‘तीस्ता’ ब्रांड के तहत प्रदर्शनी में ग्रीन टी, ब्लैक टी, व्हाइट टी, ब्लू टी और प्राकृतिक तुलसी फ्लेवर वाली चाय प्रदर्शित एवं बिक्री के लिए रखी जाएगी। किसानों के अनुसार, इन चायों को तैयार करने में काफी मेहनत लगती है। जैविक खाद का इस्तेमाल किया जाता है और कीटनाशकों से परहेज किया जाता है। कुछ विशेष हैंडमेड चाय की कीमत 5 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात भी किसानों ने कही। संघ के पदाधिकारियों को उम्मीद है कि दिल्ली की प्रदर्शनी से उत्तर बंगाल की इस विशेष चाय को देशभर में नया बाजार मिलेगा और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी पहचान बनेगी।

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