मतदान केंद्र के बाहर मतदाता राकेश साहनी अपनी शिकायत तृणमूल नेता गौतम देव के सामने दर्ज कराते हुए मतदान केंद्र के बाहर मतदाता राकेश साहनी अपनी शिकायत तृणमूल नेता गौतम देव के सामने दर्ज कराते हुए
सिलीगुड़ी

मतदाता पहुंचा वोट डालने… सिस्टम बोला– आपका वोट...

सिलीगुड़ी की घटना

Madhur Chaturwadi

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। सिलीगुड़ी के वार्ड नंबर 1 निवासी राकेश साहनी जब अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने मतदान केंद्र पहुंचे, तो उन्हें ऐसा जवाब मिला जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।

राकेश साहनी को मतदान अधिकारियों ने बताया कि उनके नाम पर वोट पहले ही डाला जा चुका है। यानी जिस वोट को डालने के लिए वह सुबह से तैयारी कर रहे थे, वह किसी और ने पहले ही डाल दिया था। यह सुनकर राकेश हैरान रह गए और मौके पर ही उन्होंने विरोध जताया।

इस घटना के बाद मतदान केंद्र पर हलचल बढ़ गई। चुनाव के दौरान इस तरह की गड़बड़ी न केवल एक व्यक्ति के अधिकार का हनन है, बल्कि पूरे चुनावी सिस्टम की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती है। राकेश को अधिकारियों की तरफ से कहा गया कि वह शाम चार बजे दोबारा आएं, तब इस मामले की जांच कर उन्हें वोट डालने का मौका दिया जाएगा।

इसी बीच, मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय नेता गौतम देव मौके पर पहुंचे। उन्होंने राकेश साहनी को साथ लिया और सीधे संबंधित बूथ पर पहुंचे। वहां उन्होंने मतदान अधिकारियों से बातचीत की और पूरे मामले की जानकारी ली। गौतम देव ने साफ कहा कि किसी भी मतदाता के अधिकार से समझौता नहीं किया जा सकता।

अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि राकेश साहनी के नाम की दोबारा जांच की जाएगी। अगर यह पाया गया कि उनके नाम पर गलत तरीके से वोट डाला गया है, तो उन्हें "टेंडर वोट" डालने की अनुमति दी जाएगी। टेंडर वोट वह प्रक्रिया है, जिसमें विवाद की स्थिति में मतदाता को अलग से वोट डालने का मौका दिया जाता है, जिसे बाद में जांच के आधार पर गिना जाता है।

हालांकि, यह सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर राकेश के नाम पर वोट किसने और कैसे डाल दिया। क्या यह सिर्फ एक तकनीकी गलती थी या फिर चुनावी गड़बड़ी का मामला?

पहले चरण के मतदान के बीच इस घटना ने यह साफ कर दिया कि चुनावी प्रक्रिया में अभी भी कई खामियां मौजूद हैं। जहां एक तरफ लोग लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं भरोसे को कमजोर कर रही हैं।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद राकेश साहनी को न्याय मिल पाता है या नहीं। क्योंकि लोकतंत्र में हर एक वोट की कीमत होती है… और जब वही वोट ‘पहले ही पड़ जाए’, तो सवाल उठना लाजिमी है।

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