मिरिक। प्रेम और स्नेह हि शान्तिका जड है ।इसे हर एक ब्यक्तिको जानना जरुरी है। यह कहना है- परम पावन टुल्कु थाम्थोक रिम्पोर्छेका । रिम्पोर्छे मिरिक के सहमेन्दु झील परिसर में एकता और विश्व शान्ति के उपर आयोजित दो दिवशीय
अन्तर्राष्ट्रिय कार्यक्रमको सम्बोधन कर रहे थे। उन्होने दार्जिलिंग पहाड तराई डुवर्स सिक्किम व आसपास से उपस्थित हुए अनुयायीओको सम्बोधन करते हुए कहाँ कि,द्वन्द्व अशान्ति से मुक्ति के लिए आध्यात्मका रस्ता हि एक मात्र सुगम माध्यम है जहाँ से शान्ति शुरु होती है। मानव जीवनको सफल बनाने के लिए खुदको धर्य , प्रतिबद्धता और समर्पण कि जरुरत होती है ।टुल्कु थाम्थोक रिम्पोर्छे ने आज के समय मे विश्व में शान्ति एकता और सदभावना जागृत करने के लिए मानवजातिको परिवर्तन करना जरुरी है ।उन्होने कहाँ कि मानव जीवन क्षणभंगुर है और आज जी रहे लोग आगामी पचास से सौ साल बाद नहि रहेगा ।इसि कारण पुस्ता दर पुस्ता शान्ति-अहिंसा का प्रतीक बनने के लिए सभीको सहि कर्म करने में ही भलाई है। अनुष्ठानका समापन कल होगी।