सिलीगुड़ी : शहर के 1 नंबर वार्ड के निवासी पेशे से शिक्षक एवं वर्तमान में एसआईआर के कार्य में नियुक्त बीएलओ श्रवण कुमार कहार की कोरोनेशन ब्रिज से तीस्ता नदी में कूद कर आत्महत्या को लेकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से एसआईआर का प्रतिवाद जताया गया है। इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस की सिलीगुड़ी टाउन ब्लॉक-1बी की ओर शनिवार को शहर के झंकार मोड़ से धिक्कार रैली निकाली गई। इस रैली में शामिल लोगों ने बैनर प्रदर्शित करते हुए एवं नारेबाजी करते हुए केंद्र सरकार, चुनाव आयोग व केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा को जम कर धिक्कारा।
इस रैली में दार्जिलिंग जिला (समतल) तृणमूल कांग्रेस की कोर कमेटी के सदस्य सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देव, सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) के चेयरमैन दिलीप दूगड़ व अन्य सैकड़ों नेता, कार्यकर्ता एवं समर्थक सम्मिलित हुए। इस अवसर पर गौतम देव ने कहा कि, यह एसआईआर भाजपा की सोची समझी साजिश है ताकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले उसके विरोधियों के नाम काट दिए जाएं और उन्हें संवैधानिक मातधिकार से वंचित कर दिया जाए। यह कितना अमानवीय है कि इसके चलते सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग हैरान-परेशान हैं। हमारे शहर में भी दो दिन पहले बीएलओ श्रवण कुमार कहार ने मौत को चुन लिया। जनता सब देख रही है। भाजपा को माफ नहीं करेगी। उसे साफ कर देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि, मृतक के परिजनों का आरोप है कि वह लंबे समय से एसआईआर के काम के अत्यधिक दबाव के चलते मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। मृतक की पत्नी ने कहा है कि लगातार काम का बोझ और एसआईआर से जुड़ा दबाव उनके पति को मानसिक रूप से कमजोर कर रहा था, जिससे वह अंदर ही अंदर टूट चुके थे। एसआईआर से जुड़े दबाव के चलते विभिन्न स्थानों से मौतों की खबरें सामने आ रही हैं, जो चिंता का विषय है। ऐसी घटनाएं समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर संकेत हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि, आखिर, यह एसआईआर एकदम चुनाव के करीब ही क्यों किया गया?, पहले क्यों नहीं किया गया?, चुनाव के करीब ही करना था तो गत वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के समय क्यों नहीं किया गया?, उस समय के मतदाता यदि आज अवैध ठहराए जा रहे हैं तो उस समय वे वैध कैसे माने गए?, फिर, उनके ही वोट से चुने गए नरेंद्र मोदी वैध प्रधानमंत्री कैसे हो गए?, यह एसआईआर वास्तव में आम लोगों के साथ भाजपा के युद्ध की घोषणा है। इसके आतंक से केवल पश्चिम बंगाल में अब तक 126 लोगों की जानें गई हैं जिनका ब्योरा मिल सका है। वैसे यह संख्या और भी ज्यादा हो सकती है। आम मतदाताओं से लेकर बीएलओ तक आत्महत्या को मजबूर हुए हैं। इस सबका हिसाब भाजपा को देना होगा। जनता सारा हिसाब करेगी। तृणमूल कांग्रेस प्रतिबद्ध है कि वोटर लिस्ट से एक भी वैध मतदाता का नाम कटने नहीं देंगे। इसके लिए जो-जो करना होगा सब करेंगे।