पदयात्रा शामिल प्रतिनिधि व श्रमिक  
सिलीगुड़ी

प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन के एक रैली का आयोजन

नागराकाटा: चाय श्रमिकों की विभिन्न दीर्घकालीन समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर आदिवासी विकास परिषद के श्रमिक संगठन प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर, राजीपाड़ा सरना प्रार्थना सभा तथा भारत मुंडा समाज के सहयोग से वीरपाड़ा स्थित सरना सेवा मैदान से 26 जनवरी को एक पदयात्रा निकाली गई। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य बंद पड़े चाय बागानों को पुनः चालू करना, चाय श्रमिकों के भविष्य निधिसे संबंधित समस्याओं का समाधान, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी में हो रही देरी और अनियमितताओं को समाप्त करना तथा चाय श्रमिकों को खतियान पट्टा उपलब्ध कराना है।

वीरपाड़ा से शुरू हुई यह पदयात्रा बीते दिन लख्खीपाड़ा पहुंचकर विश्राम पर रही, जबकि मंगलवार मेटेली प्रखंड के सुनगाछी में विश्राम करने का कार्यक्रम है। यह पदयात्रा 30 जनवरी को सिलीगुड़ी के दागापुर स्थित श्रमिक भवन पहुंचकर एक महा-सभा में परिवर्तित होगी। उसी दिन सभी मांगों को लेकर श्रम विभाग को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन के महासचिव बाबलू माझी ने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों पर चाय श्रमिकों को केवल आश्वासनों का लॉलीपॉप दिखाकर बहलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “वर्षों से श्रमिकों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन सत्ता में बैठे लोग समाधान के बजाय केवल भाषण और वादे कर रहे हैं।उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 30 जनवरी की सभा के बाद भी चाय श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो संगठन चाय श्रमिकों को साथ लेकर एक व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। मांगों की अनदेखी होने पर चुनाव बहिष्कार जैसे कदम उठाए जाने की संभावना से भी उन्होंने इंकार नहीं किया। वहीं, राजीपाड़ा प्रार्थना सेवा के अलीपुरद्वार जिला सचिव परिमल उरांव ने कहा कि चाय श्रमिकों की समस्याओं को वर्षों से लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बंद पड़े चाय बागानों के कारण हजारों श्रमिक परिवार रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। परिमल उरांव ने पीएफ, ग्रेच्युटी और खतियान पट्टा को चाय श्रमिकों का मूल अधिकार बताते हुए सरकार और श्रम विभाग से इस दिशा में तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग की।

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