गंगटोक : सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्रियां हासिल करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, बौद्धिक विकास और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उन्होंने युवाओं से अपने ज्ञान, कौशल और तकनीक का उपयोग समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सशक्त बनाने तथा राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल शनिवार को चिंतन भवन में आयोजित इकफाई विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह में कुलाध्यक्ष (विजिटर) के रूप में शामिल हुए। समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर एआईजी हॉस्पिटल्स के संस्थापक एवं चेयरमैन तथा पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित प्रख्यात चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. दुव्वुर नागेश्वर रेड्डी उपस्थित रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. ओ. आर. एस. राव और कुलपति डॉ. जगन्नाथ पटनायक भी मौजूद थे।
समारोह की शुरुआत अकादमिक शोभायात्रा के साथ हुई, जिसके बाद राज्यपाल ने विधिवत दीक्षांत समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और डिग्रियां प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विशिष्ट हस्तियों को मानद उपाधि ‘ऑनोरिस कॉसा’ सहित अन्य सम्मानों से नवाजा गया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल माथुर ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल क्रांति, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का है। ऐसे में युवाओं को तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए अपनी रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता के माध्यम से भारत को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहिए।
स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है, जो मनुष्य की आंतरिक शक्ति को बढ़ाए और उसे आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करे। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों को याद करते हुए उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि बड़े सपने ही नए आविष्कारों, स्टार्टअप और सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी देश की ऊर्जावान युवा पीढ़ी के कंधों पर है। प्रधानमंत्री के आह्वान ‘हम यह करके रहेंगे’ को दोहराते हुए उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लेने का आग्रह किया, जिस पर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपनी सहमति व्यक्त की।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक भारत एक विकसित, समर्थ और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक होगी।
महात्मा गांधी के संदेश ‘खुद वह बदलाव बनें, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं’ का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवाओं से जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छूने के बावजूद अपनी जड़ों, समृद्ध भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों को बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता केवल स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों का हाथ थामकर उन्हें भी आगे बढ़ाने में निहित है। समारोह का समापन राज्यपाल द्वारा दीक्षांत समारोह के औपचारिक समापन की घोषणा के साथ हुआ।