भाषण देते गोर्खा जनमुक्ति मोर्चा अध्यक्ष बिमल गुरुंग  
सिलीगुड़ी

2026 विधानसभा चुनाव में समर्थन का फैसला समय पर होगा: बिमल गुरुंग

नागराकाटा: आगामी 2026 विधानसभा चुनाव में गोर्खा जनमुक्ति मोर्चा किसे समर्थन देगा, इसका निर्णय समय आने पर लिया जाएगा। अब तक सभी राजनीतिक दलों ने पहाड़-तराई-डुआर्स के साथ केवल राजनीतिक खेल किया है। गोर्खा जनमुक्ति मोर्चा ने इस क्षेत्र से विधायक, सांसद और मंत्री बनाए, लेकिन सत्ता में पहुंचने के बाद किसी ने भी यहां के लोगों की सुध नहीं ली।, जसवंत सिंह एसएस अहलूवालिया, राजू विष्ट, जॉन बारला, मनोज टिग्गा को गोर्खा जन्म मुक्ति मोर्चा ने सांसद मंत्री बनाया है। यह बातें रविवार को नागराकाटा ब्लॉक के शिप्चू फॉरेस्ट बस्ती में गोर्खा जनमुक्ति मोर्चा द्वारा आयोजित 15वें बलिदान दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेताओं ने कही। इस अवसर पर मांग की गई कि ग्रेटर कूचबिहार की अलग राज्य की मांग करने वाले जीवन सिंह को, जो पिछले 35 वर्षों से जेल में बंद हैं, अविलंब रिहा किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि इस बार पहाड़ के साथ-साथ डुआर्स क्षेत्र के गोरखा, आदिवासी, राजवंशी, कोचे, मेची, राभा, बिहारी, बंगाली, मारवाड़ी और मुस्लिम समुदाय को एकजुट कर अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पहाड़-तराई क्षेत्र में इंटरलोक्यूटर भेजा है, जिनके समक्ष मोर्चा ने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें पहाड़-तराई-डुआर्स को मिलाकर अलग राज्य गोरखालैंड का गठन, यूनियन टेरिटरी की मांग तथा 11 गोरखा जातियों को जनजाति का दर्जा देने का मुद्दा शामिल है। इंटरलोक्यूटर के डुआर्स दौरे की भी संभावना जताई गई है। मोर्चा नेताओं ने कहा कि इस बार केंद्र सरकार से कुछ उम्मीदें हैं, लेकिन यदि कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी संगठनों के साथ बैठकर रणनीति तय की जाएगी और उसी समय यह निर्णय लिया जाएगा कि किसे समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और तृणमूल कांग्रेस, दोनों ने ही पहाड़-तराई-डुआर्स की जनता को छलने का काम किया है, जिसके कारण आज गोरखा, आदिवासी, राजवंशी सहित अन्य समुदायों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। फिलहाल गोर्खा जनमुक्ति मोर्चा भाजपा का घटक दल है और आगे केंद्र सरकार की ओर से आने वाले सकारात्मक निर्णयों का इंतजार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि 8 फरवरी 2011 को अलग राज्य की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान, तत्कालीन वाम सरकार के समय शिप्चू गोलीकांड में गोर्खा जनमुक्ति मोर्चा के तीन कार्यकर्ता—नीता खवास, बिमल राई और विक्की लामा—पुलिस फायरिंग में शहीद हो गए थे। तभी से हर वर्ष इसी स्थान पर बलिदान दिवस का आयोजन कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

रविवार सुबह 8 बजे आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले शहीद स्थल पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद शिप्चू पार्क स्थित शहीद वेदी पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। इस अवसर पर मोर्चा अध्यक्ष विमल गुरुंग ने शिप्चू पार्क में तीनों शहीदों की प्रतिमा निर्माण का शिलान्यास किया।

कार्यक्रम में तराई-डुआर्स के अलावा दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जिलों से बड़ी संख्या में मोर्चा समर्थक पहुंचे थे। इस दौरान शहीद परिवारों को फूल, सम्मान पत्र और शोक संदेश देकर सम्मानित किया गया। साथ ही 2011 के आंदोलन में जेल जाने वाले सभी कार्यकर्ताओं को भी मंच पर सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में गोर्खा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष विमल गुरुंग के अलावा महासचिव रोशन गिरी, नारी मोर्चा अध्यक्ष आशा गुरुंग, केंद्रीय सचिव शिव सुनवार, कामतापुर स्टेटहुड डिमांड कमेटी की तापसी राय मलिक, आदिवासी समुदाय से लुइस कुजूर, आदिवासी गोरखा संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष संघन मोक्तान सहित अन्य नेता उपस्थित थे।

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