कालचीनी: टिन और लकड़ी से बनी जर्जर दीवारें ज़रा-सी बारिश में जवाब दे देती थी और पूरा परिवार घर के एक कोने में सिमटकर रात काटने को मजबूर होता था। लेकिन आज वही रातें सुकून से कटती हैं, क्योंकि सिर के ऊपर अब मज़बूत पक्की छत है। राज्य सरकार की बांग्लार बाड़ी योजना ने अलीपुरदुआर जिले के कालचिनी ब्लॉक की लताबाड़ी ग्राम पंचायत अंतर्गत उत्तर फ़ॉरवर्डनगर इलाके के निवासी खोक़ा मियां की ज़िंदगी को नई दिशा दे दी है। वर्षों तक जर्जर कच्चे घर में परिवार के साथ रहने वाले खोक़ा मियां के लिए पक्का घर किसी सपने से कम नहीं था। आर्थिक तंगी के चलते वे कभी अपने बलबूते यह सपना पूरा नहीं कर सकते थे।
बरसात में घर के भीतर पानी भर जाना, तेज़ हवा में दीवारों के गिरने का डर और हर रात अनिश्चितता यही उनकी रोज़मर्रा की हक़ीक़त थी। ऐसे हालात में जब उनका नाम योजना के लाभार्थियों की सूची में आया, तो मानो ज़िंदगी ने करवट ले ली। योजना के तहत पक्का घर मिलने के बाद अब खोक़ा मियां अपने परिवार के साथ सुरक्षित और स्थायी आवास में सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। इस विषय पर खोक़ा मियां भावुक होकर कहते हैं, “अब बारिश या तूफ़ान से डर नहीं लगता। परिवार के साथ चैन से सो पाता हूं । इसके लिए मुख्यमंत्री का दिल से आभार।” लताबाड़ी ग्राम पंचायत के सदस्य अमूल्य राय ने बताया कि पहले खोक़ा मियां बेहद जर्जर कच्चे घर में रहते थे। ‘बंगाल का घर’ परियोजना के माध्यम से उन्हें पक्का मकान उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना से इलाके के कई ग़रीब और असहाय परिवारों को स्थायी छत मिली है।