अलीपुरदुआर : वन विभाग के संयुक्त और सतर्क प्रयासों से आखिरकार भटके हुए हाथियों के झुंड को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेज दिया गया। इस सफलता के बाद इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली। बुधवार को जलदापाड़ा के डीएफओ पारवीन कासवान ने इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि घने कोहरे के कारण रास्ता भटक कर 17 हाथियों का एक झुंड अलीपुरदुआर-कुचबिहार जिला सीमांत बालासुंदर इलाके में आबादी क्षेत्र में प्रवेश कर गया था। वन विभाग के अनुसार, यह हाथियों का झुंड दालगांव वन क्षेत्र से खैरबाड़ी वन क्षेत्र की ओर जा रहा था। कम दृश्यता के कारण झुंड अपने निर्धारित कॉरिडोर से भटक गया। इस झुंड में पांच शावक भी शामिल थे, जिससे स्थिति और भी संवेदनशील बन गई थी। रातभर वनकर्मियों ने हाथियों के पैरों के निशान के सहारे उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। इस दौरान हाथियों का झुंड दो प्रमुख सड़कों और एक रेलवे लाइन को पार करते हुए दुडुआ नदी के किनारे काशबन में शरण लेता है। यह स्थान नजदीकी वन क्षेत्र से लगभग 20 किलोमीटर दूर था, जिससे खतरा और बढ़ गया था।
सूचना मिलते ही जलपाईगुड़ी, जलदापाड़ा, कूचबिहार डिवीजन और बक्सा टाइगर रिजर्व के वनकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। करीब 10 अलग-अलग टीमों को तैनात कर पूरे इलाके की घेराबंदी की गई। आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए माइकिंग के जरिए लगातार घोषणाएं की गईं। जिला प्रशासन ने एहतियातन इलाके में BNHS-163 धारा भी लागू कर दी। झुंड में शावक होने के कारण किसी भी तरह की आक्रामक प्रतिक्रिया की आशंका थी, इसलिए वन विभाग ने शाम तक इंतजार किया और पूरी रणनीति के साथ कार्रवाई की। समन्वित प्रयासों के बाद हाथियों को धीरे-धीरे जंगल की ओर मोड़ा गया। 14 जनवरी बुधवार की तड़के घने कोहरे के बीच हाथियों का झुंड सुरक्षित रूप से दक्षिण खैरबाड़ी वन क्षेत्र में प्रवेश कर गया। इस दौरान रेलवे विभाग के सहयोग से ट्रेनों की गति नियंत्रित की गई, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना न हो। जलदापाड़ा के डीएफओ ने बताया कि इस पूरे अभियान में किसी भी तरह की जान-माल की क्षति नहीं हुई। वन विभाग की तत्परता और समन्वय से एक बड़ी अनहोनी टल गई और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति को सफलतापूर्वक संभाल लिया गया हैं।