सिलीगुड़ी

चाय बागानों के मजदूरों ने शुरू की 110 किलोमीटर लंबी पदयात्रा

गणतंत्र दिवस पर अलीपुरदुआर जिला के बीर पाड़ा से चले और 30 जनवरी को सिलीगुड़ी पहुंचेंगे, वहां अतिरिक्त श्रम निदेशक के कार्यालय श्रमिक भवन में प्रदर्शन कर अपनी मांगें रखते हुए समाधान की मांग करेंगे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 से पहले चाय बागान मजदूरों की बहुप्रतीक्षित न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण कर उसे लागू करने, बंद चाय बागानों को खोलने और मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांगें

नागराकाटा : चाय बागान मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगभग 110 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू की है। इसके तहत वे बीते सोमवार को गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी को अलीपुरदुआर जिला के बीर पाड़ा के सरना सेवा मैदान से चले और आगामी 30 जनवरी को दार्जिलिंग जिला के सिलीगुड़ी महकमा स्थित डागापुर में अतिरिक्त श्रम निदेशक के कार्यालय श्रमिक भवन पहुंचेंगे। वहां वे सभा व प्रदर्शन कर अपनी मांगें रखते हुए समाधान की मांग करेंगे।

अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद (अभाआविप) समर्थित प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन (पीटीडब्ल्यूयू) की ओर से राजीपाड़ा सरना प्रार्थना सभा एवं भारत मुंडा समाज के सहयोग से यह अभियान किया गया है। उनकी मांगें हैं कि, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 से पहले चाय बागान मजदूरों की बहुप्रतीक्षित न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण कर उसे लागू किया जाए। चाय बागान क्षेत्रों में बसने वाले मजदूरों को उनकी जमीन का पूरा मालिकाना हक दिया जाए, उनके पीएफ का भुगतान नियमित हो, ग्रैच्यूटी लाभ के हकदारों को उसका लाभ दिया जाए, समस्त बंद चाय बागानों को जल्द से जल्द खोला जाए, बोनस, पीएफ व अन्य बकाया का भुगतान अविलंब सुनिश्चित किया जाए।

यह पदयात्रा 26 जनवरी की रात लक्खी पाड़ा में विश्राम पर रही जबकि 27 जनवरी की रात मेटेली प्रखंड के सुनगाछी में विश्राम निर्धारित था। आगामी 30 जनवरी को सिलीगुड़ी के डागापुर स्थित श्रमिक भवन पहुंच कर यह पदयात्रा एक महासभा में परिवर्तित होगी। उसी दिन सभी मांगों को लेकर श्रम विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।

प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन के महासचिव बबलू मांझी ने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों पर चाय बागान मजूदरों को केवल आश्वासनों का लॉलीपॉप दिखाकर बहलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, वर्षों से श्रमिकों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन सत्ता में बैठे लोग समाधान के बजाय केवल भाषण और वायदे कर रहे हैं। यदि 30 जनवरी की सभा के बाद भी चाय श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो संगठन चाय श्रमिकों को साथ लेकर एक व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। चुनाव बहिष्कार जैसे कदम भी उठाए जाने की संभावना से उन्होंने इनकार नहीं किया।

वहीं, राजीपाड़ा प्रार्थना सेवा के अलीपुरद्वार जिला सचिव परिमल उरांव ने कहा कि, चाय श्रमिकों की समस्याओं को वर्षों से लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। बंद पड़े चाय बागानों के कारण हजारों श्रमिक परिवार रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। श्रम विभाग व सरकार इस दिशा में तुरंत ठोस कदम उठाए। उन्होंने इस शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन को सफल बनाने के लिए सभी चाय श्रमिकों, आदिवासी समाज और आम जनता से एकजुट होने की अपील की है।

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