राबिया शेख,सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी शहर की पहचान और इतिहास से गहराई से जुड़ा सिलीगुड़ी टाउन स्टेशन अब लंबे इंतजार के बाद अपने पुराने गौरव की ओर लौट रहा है। दशकों से उपेक्षित इस ऐतिहासिक स्टेशन के पुनरुद्धार का काम शुरू हो चुका है। रेलवे की ओर से इसके लिए करीब तीन करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। स्टेशन के पुराने भवन, विशाल कमरों की दीवारों, पारंपरिक टिन की छत और आसपास के ढांचे को संरक्षित करते हुए इसे नया रूप देने की तैयारी है। साथ ही भविष्य में यहां एक म्यूजियम विकसित करने की योजना भी है।सिलीगुड़ी टाउन स्टेशन का इतिहास शहर के विकास से जुड़ा हुआ है। उत्तर बंगाल में रेल संपर्क के विस्तार के साथ सिलीगुड़ी एक छोटे से कस्बे से धीरे-धीरे व्यापार और आवागमन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ। रेल आने के बाद स्टेशन के आसपास बाजार, गोदाम और बस्तियां विकसित होने लगीं। चाय उद्योग के विस्तार के साथ सिलीगुड़ी से पहाड़ और मैदानी इलाकों के बीच माल तथा यात्रियों की आवाजाही भी बढ़ती गई।
दार्जिलिंग की ओर जाने वाले रेल संपर्क के विकास में भी सिलीगुड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टॉय ट्रेन के जरिए पहाड़ों तक पहुंच और चाय, संतरे तथा अन्य सामान के कारोबार ने इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति दी। बाद में देश के विभाजन और रेल नेटवर्क में बदलाव के साथ सिलीगुड़ी जंक्शन तथा फिर न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन का महत्व बढ़ता गया। इसके परिणामस्वरूप टाउन स्टेशन की व्यस्तता धीरे-धीरे कम होती गई।समय के साथ स्टेशन का पुराना ढांचा भी जर्जर होने लगा। बावजूद इसके यह स्टेशन आज भी सिलीगुड़ी के पुराने दौर की यादों को अपने भीतर समेटे हुए है। अब इसके संरक्षण की पहल से शहर के इतिहास और विरासत को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।रेलवे की योजना के तहत स्टेशन की मूल वास्तुकला और पुराने स्वरूप को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पुराने हिस्सों की मरम्मत के साथ आसपास के बुनियादी ढांचे को भी व्यवस्थित किया जाएगा। स्टेशन परिसर में संग्रहालय बनने की योजना पूरी होने पर यहां सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल के रेल इतिहास से जुड़ी चीजों को प्रदर्शित किए जाने की संभावना है।
शहर के पुराने निवासियों के लिए यह स्टेशन सिर्फ रेल यात्रा का एक पड़ाव नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी के विकास की कहानी का हिस्सा है। अब पुनरुद्धार के बाद यह ऐतिहासिक परिसर आने वाली पीढ़ियों को शहर के उस दौर से जोड़ने का माध्यम बन सकता है, जब सिलीगुड़ी में रेल के साथ व्यापार, पर्यटन और पहाड़ों से संपर्क का विस्तार तेजी से शुरू हुआ था।रेलवे की यह पहल सफल रहती है तो सिलीगुड़ी टाउन स्टेशन एक बार फिर शहर के नक्शे पर अपनी अलग पहचान बना सकता है—इस बार व्यस्त रेलवे स्टेशन के रूप में नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी की ऐतिहासिक विरासत के रूप में।