सिलीगुड़ी

प्रशासन की नाक के नीचे बालू का खेल, कार्रवाई के बाद भी क्यों नहीं थम रहा अवैध खनन?

बालासन से महानंदा, चेंगा और अन्य नदी क्षेत्रों तक लगातार पकड़े जा रहे वाहन; लोगों का सवाल—आखिर किसके इशारे पर चल रहा कारोबार?

Khodija Khatun (Rabia)

सिलीगुड़ी: नदियों से अवैध बालू खनन पर रोक है, निगरानी और कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन प्रशासन की नाक के नीचे अवैध बालू खनन और तस्करी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सिलीगुड़ी के बालासन नदी क्षेत्र से लेकर माटीगाड़ा, फांसीदेवा, घोषपुकुर और नक्सलबाड़ी तक हाल के महीनों में लगातार बालू लदे वाहन पकड़े गए हैं। कार्रवाई होती है, वाहन जब्त होते हैं, चालक गिरफ्तार होते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही तस्वीर सामने आ जाती है। ऐसे में आम लोगों का सवाल है—आखिर अवैध बालू का यह खेल बंद क्यों नहीं हो रहा? सबसे हालिया कार्रवाई 10 सितंबर को नक्सलबाड़ी के पानीघाटा मोड़ पर हुई, जहां बालू लदा डंपर जब्त कर चालक को गिरफ्तार किया गया। 27 अगस्त को माटीगाड़ा में बालासन नदी से कथित तौर पर निकाले गए बालू से लदा ट्रक पकड़ा गया। मई में भी माटीगाड़ा में दो ट्रक जब्त किए गए। फांसीदेवा में मई के दौरान चेंगा नदी से बालू लदी लॉरी और महानंदा नदी से डंपर पकड़े जाने की कार्रवाई सामने आई। घोषपुकुर में जून में 14 डंपर कथित अवैध बालू के साथ पकड़े गए, जबकि जुलाई में सिलीगुड़ी के समरनगर स्थित मिलिट्री घाट से छह लॉरियां जब्त की गईं।

दरअसल, दार्जिलिंग जिले में 1 जुलाई 2022 से मानसून अवधि में नदी तल से बालू उठाव, लोडिंग और परिवहन पर रोक लगाई गई थी। एनजीटी ने भी बालासन क्षेत्र में नियमों के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए थे।इसके बावजूद अगर नदी से बालू लगातार निकल रहा है तो सवाल सिर्फ पकड़े गए डंपरों का नहीं, उस पूरे तंत्र का है। आखिर प्रशासन की नजर से बचकर खनन कौन करा रहा है? वाहन कौन भेज रहा है? बाजार तक बालू कौन पहुंचा रहा है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या अब तक सिर्फ वाहन और चालक ही पकड़े जाएंगे या उस नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड तक भी कार्रवाई पहुंचेगी?

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