मालदा : मालदा में बाढ़ और नदी कटाव की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर रविवार को राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने जिला प्रशासन के साथ बैठक की। भूतनी क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने गंगा और फूलहर नदियों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में दोनों नदियों के मिलने से मालदा में भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों के साथ रेल और सड़क संपर्क भी बाधित होने का खतरा है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर मुख्य सचिव रविवार सुबह हेलीकॉप्टर से कोलकाता से मालदा पहुंचे। उन्होंने भूतनी क्षेत्र में बाढ़ के बाद की स्थिति का निरीक्षण किया। इसके बाद इंग्लिशबाजार के पुराने हवाई अड्डे पर हेलीकॉप्टर उतरा और सुबह 11 बजे जिला प्रशासनिक भवन में बैठक हुई। इसमें सिंचाई विभाग के राज्य मंत्री जोएल मुर्मू, जिलाधिकारी राजनवीर सिंह कपूर, पुलिस अधीक्षक अनुपम सिंह सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
बैठक के बाद मुख्य सचिव ने बताया कि पिछले 50 वर्षों में भूतनी क्षेत्र के पास गंगा नदी का प्रवाह लगभग छह किलोमीटर दाईं ओर खिसक गया है। वहीं, फूलहर नदी का प्रवाह भी करीब दो किलोमीटर विपरीत दिशा में बदल गया है। इसके कारण रतुआ और भूतनी क्षेत्र में दोनों नदियां काफी करीब आ गई हैं। यदि वे आपस में मिल गईं, तो बाढ़ पर नियंत्रण करना मुश्किल हो सकता है और उत्तर बंगाल का संपर्क प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि मानिकचक से लगभग 16 किलोमीटर दूर बिहार और झारखंड की सीमा से सटे नदी क्षेत्र में कटावरोधी कार्य शुरू करने की योजना है। बिहार सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिल गया है, लेकिन झारखंड की मंजूरी अभी बाकी है। मुख्यमंत्री के 27 अक्टूबर को दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के साथ इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है।
मुख्य सचिव के अनुसार, गंगा के पुराने प्रवाह मार्गों को दोबारा उपयोगी बनाने के लिए ड्रेजिंग का काम प्रस्तावित है। पहले चरण में इस पर 50 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है। राज्य सरकार नदी विशेषज्ञों की मदद से एक पायलट परियोजना पर भी काम कर रही है। जनवरी से कंक्रीट के तटबंध बनाने की योजना है।
उत्तर मालदा के भाजपा सांसद खगेन मुर्मू ने कहा कि बरसात के मौसम में भूतनी समेत जिले के कई इलाकों के लोगों को बाढ़ की समस्या झेलनी पड़ती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार की पहल से इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।