सिलीगुड़ी

सोरेंग में परी प्रकाशन का छठा स्थापना दिवस समारोह, मुख्यमंत्री प्रेमसिंह तामांग ने 15 साहित्यिक कृतियों का किया लोकार्पण

Abhijit Dey

सोरेंग : सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग ने गुरुवार को सोरेंग के डाकबंगला स्थित अभियान्त्रिकी परिसर में आयोजित परी प्रकाशन के छठे स्थापना दिवस समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर विभिन्न लेखकों की 15 साहित्यिक कृतियों के साथ संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा से संबंधित पाठ्य सामग्री के संकलन का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग ने परी प्रकाशन को छठे स्थापना दिवस की शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कहा कि नए और उभरते लेखकों को प्रोत्साहित करना तथा उनकी साहित्यिक कृतियों को पाठकों तक पहुंचाने के लिए मंच उपलब्ध कराना परी प्रकाशन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने इस अवसर पर अपनी कृतियों का लोकार्पण कराने वाले 15 लेखकों को भी बधाई दी और साहित्य के क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक सहयोग, प्रोत्साहन और हौसले की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने 20 अगस्त 1992 के ऐतिहासिक दिन को स्मरण करते हुए कहा कि इसी दिन नेपाली भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुई थी। उन्होंने नेपाली भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने में पूर्व मुख्यमंत्री नरबहादुर भंडारी तथा पूर्व सांसद दिलकुमारी भंडारी के योगदान को भी स्मरण किया।

कार्यक्रम में नेपाली भाषा में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के पाठ्यक्रम में निर्धारित पाठ्य सामग्री के संकलन ‘यूपीएससी संदर्भ पाठ संग्रह’ के महत्व पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संग्रह लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी स्रोत सामग्री साबित होगा।

इस अवसर पर परी पुरस्कार 2026 के पुरुष वर्ग के विजेता टी.बी. गुरूंग तथा महिला वर्ग की विजेता मीना सुब्बा को पुरस्कार प्रदान किया गया। दोनों पुरस्कार विजेताओं ने सम्मान के लिए परी प्रकाशन तथा मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह में लोकार्पित 15 कृतियों में लक्ष्मी प्रसाद शर्मा की पसीने का रंग, रोहन राई की मैंने जिया हुआ समय, उपासना शर्मा की मेरा प्रतिस्पर्धी, शाविनकुमार लिम्बू की चेहरों का ताम्भुङ, विजय राई की अमूर्त यात्रा, बिदुर वशिष्ठ की अनुभूति, प्रयास प्रधान की मैं लिखने को बाध्य हूं, सफिक बान्तवा की मुखौटों का शहर, पदमबहादुर मगर की मौनता की आवाज, रविन राई की कर्णधार, कौशिला उप्रेती की चुल्ठो, भरत सापकोटा की स्मृतियों के भीतर की कविताएं, अभिचन्द्र सिग्देल की बालन, भरत शर्मा की समृद्धि की पगडंडी पर सिक्किम तथा बी.आर. खरेल की मखमली शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त रजनी पेघा, डी.पी. अधिकारी, एस.एम. बस्नेत और पूर्णिमा की अन्य पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। ‘यूपीएससी संदर्भ पाठ संग्रह’, जिसमें परीक्षा के पाठ्यक्रम में निर्धारित संपूर्ण पाठों को संकलित किया गया है, का भी औपचारिक विमोचन हुआ। परी प्रकाशन के उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष सी.पी. शर्मा ने बताया कि संस्था की स्थापना 1 अक्टूबर 2020 को हुई थी। उन्होंने कहा कि स्थापना के बाद से प्रकाशन ने लेखकों को मंच प्रदान करने तथा उनकी साहित्यिक कृतियों को आम पाठकों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया है। उन्होंने सिक्किम की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में युवाओं की भागीदारी की भी सराहना की।

समारोह में जम सालघारी के विधायक मदन सेन्चुरी, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जैकब खालिंग तथा अबिगेल राई ने कविता पाठ किया। कविता पाठ ने समारोह को और अधिक साहित्यिक एवं रचनात्मक बना दिया। इस अवसर पर हेवनली निर्वाण पाथ द्वारा ‘आमास हीलिंग: जंगलदेखि समाजसम्म’ शीर्षक पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया।

परी प्रकाशन आयोजन समिति ने साहित्य के क्षेत्र में योगदान तथा संस्था के साथ सहयोग के लिए मुख्यमंत्री प्रेमसिंह तामांग सहित विभिन्न कवियों और लेखकों को सम्मानित एवं अभिनंदित किया। समारोह में विधानसभा अध्यक्ष एम.एन. शेर्पा, सड़क एवं पुल विभाग के मंत्री एन.बी. दाहाल, भवन एवं आवास विभाग के मंत्री भीमहांग लिम्बू, परी प्रकाशन के अध्यक्ष सी.पी. शर्मा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जैकब खालिंग, विधायक, जिला पंचायत प्रतिनिधि, अधिकारी, विभागाध्यक्ष, प्रधानाचार्य, सरकारी अधिकारी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह का समापन सिक्किम में नेपाली भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ नवोदित लेखकों और स्रष्टाओं को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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