गेजिंग : सिक्किम विश्वविद्यालय ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार के सहयोग से संचालित डीएसटी-सीड परियोजना के तहत 31 अक्टूबर को गेजिंग जिले के नेशा गांव में सब्जी उत्पादन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। खुले और संरक्षित वातावरण में खेती की तकनीकों पर केंद्रित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक किसानों, कृषि उद्यमियों और ग्रामीण युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में सिक्किम कंज्यूमर कोऑपरेटिव सोसाइटी की अध्यक्ष शांति सुब्बा मुख्य अतिथि थीं। अपर चोंगरांग की वार्ड पंचायत छिरिंग ओंगमू लेप्चा और कंचनजंघा कंजर्वेशन कमेटी (केसीसी) की अध्यक्ष युडेन छिरिंग भूटिया भी उपस्थित रहीं। शांति सुब्बा ने दूरस्थ गांवों तक तकनीकी सहयोग पहुंचाने की पहल की सराहना की और किसानों से उपलब्ध संसाधनों व प्रशिक्षण का लाभ उठाकर खेती में सुधार तथा आजीविका के अवसर बढ़ाने का आग्रह किया। तकनीकी सत्र में परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं सिक्किम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लक्ष्मण शर्मा ने उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बेमौसमी सब्जी उत्पादन, संसाधन प्रबंधन और सामूहिक विपणन के महत्व पर जानकारी दी। केसीसी के परियोजना समन्वयक डॉ. सुरेन लिम्बू ने संरक्षित खेती के ढांचों और सर्दियों में सब्जी उत्पादन की तकनीकें समझाईं। कृषि विभाग के सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक विजय गुरंग ने जैविक खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन पर मार्गदर्शन दिया। परियोजना के तहत 100 किसानों के खेतों में सब्जी उत्पादन के प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किसानों को बीज और जैव-कीटनाशक दिए गए हैं। वहीं, करीब 15 किसानों को कम लागत वाले वॉक-इन पॉली टनल और रेन शेल्टर के जरिए संरक्षित खेती के लिए चुना गया है। प्रशिक्षण के बाद परियोजना अन्वेषकों ने चयनित खेतों का दौरा कर किसानों को तकनीकी सहायता भी दी।