सिलीगुड़ी : वर्तमान में जब दुर्गापूजा में थीम और आकर्षक पंडाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनते हैं, वहीं सिलीगुड़ी की मित्र सन्मिलनी इस बार अपनी पूजा के शताब्दी वर्ष में शहर के पुराने दिनों की यादों को पंडाल में जीवंत करने जा रही है। पंडाल में पुराने सिलीगुड़ी की जीवनशैली, पूजा की परंपरा और उस दौर से जुड़ी कई यादें देखने को मिलेंगी। मित्र सन्मिलनी क्लब की स्थापना वर्ष 1909 में हुई थी और वर्ष 1927 में यहां दुर्गापूजा की शुरुआत हुई। अब यह पूजा अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। इसी खास अवसर पर इस बार की पूजा की थीम पुराने सिलीगुड़ी की उन यादों पर आधारित है, जो समय के साथ शहर की बदलती तस्वीर में कहीं पीछे छूट गई हैं। एक समय लोग दूर-दराज से बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी से मित्र सन्मिलनी की पूजा देखने पहुंचते थे।पूजा के दौरान यहां लोगों की महफिल जमती थी, वहीं नाटक का भी आयोजन होता था। पंडाल में उस दौर के आवागमन, उत्सव के माहौल और शहर की जीवनशैली की झलक पेश की जाएगी। इस बार पंडाल का खास आकर्षण पुराने सिलीगुड़ी की टॉय ट्रेन होगी। कभी हिल कार्ट रोड से मित्र सन्मिलनी के सामने से होकर टॉय ट्रेन गुजरती थी। इसी ऐतिहासिक याद को फिर से जीवंत करने की तैयारी की गई है। राजा-महाराजाओं के आगमन से लेकर आम लोगों के पूजा देखने पहुंचने तक, पुराने सिलीगुड़ी की कई तस्वीरें यहां देखने को मिलेंगी। मित्र सन्मिलनी के महासचिव सौरभ भट्टाचार्य ने बताया कि पुराने दौर की पूजा और सिलीगुड़ी के इतिहास से जुड़ी यादों को इस बार पंडाल में प्रस्तुत किया जाएगा। हालांकि, पूजा के शताब्दी वर्ष में भी पारंपरिक पूजा पद्धति में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। यहां परंपरागत प्रतिमा और पुराने रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा होगी। अष्टमी का भोग भी पूजा का प्रमुख आकर्षण रहेगा। पूजा के अवसर पर महालया के दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन होगा। वहीं शहर के करीब 100 वरिष्ठ नागरिकों के हाथों पूजा का शुभारंभ कराने की भी योजना है।