रंगपो : मानव उत्थान सेवा समिति के उत्तर पूर्वांचल क्षेत्र एवं सिक्किम राज्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में पाक्योंग जिले के रंगपो स्थित खेल मैदान में दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में परम पूज्य सद्गुरुदेव सतपालजी महाराज, विभुजी महाराज तथा सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग ने अध्यात्म, मानवता, राष्ट्रीय एकता, सद्भावना और विश्व शांति के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और अखंड ज्योति प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर सद्गुरुदेव सतपालजी महाराज, उनके ज्येष्ठ पुत्र विभुजी महाराज, मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों का माल्यार्पण और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के साथ समाज में प्रेम, भाईचारा, सहिष्णुता और पारस्परिक सद्भाव को बढ़ावा देना है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विभुजी महाराज ने युवाओं से आध्यात्मिक जागरण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति है और उनमें सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सेवा भावना तथा आध्यात्मिक चेतना का विकास आवश्यक है।
आध्यात्मिकता से ही संभव है स्थायी शांति: मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग
सम्मेलन के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग ने सद्गुरुदेव श्सतपालजी महाराज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन और आशीर्वाद से सिक्किम के लोगों को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों तथा मानव सेवा की भावना को आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में शांति, प्रेम और सद्भाव कायम रखने में आध्यात्मिक शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस तरह के सम्मेलन विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ, एकता और भाईचारे को मजबूत करने में सहायक होते हैं।
उन्होंने कहा कि भौतिक समृद्धि से ही स्थायी शांति और आनंद प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए आध्यात्मिक चेतना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने आध्यात्मिक व्यक्तित्वों के जनसेवा और राजनीति में योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यदि ऐसे महान व्यक्तित्व राजनीतिक नेतृत्व में आगे आएं, तो देश की समृद्धि और विकास को नई दिशा मिल सकती है।
विश्व शांति के लिए आध्यात्मिक ज्ञान आवश्यक: सतपालजी महाराज
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण परम पूज्य सद्गुरुदेव सतपालजी महाराज का आध्यात्मिक प्रवचन रहा। उन्होंने कहा कि विश्व में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अध्यात्म की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज में बढ़ते संघर्ष, असहिष्णुता, विभाजन और अशांति को कम करने के लिए मनुष्य को अपनी अंतरचेतना जागृत करते हुए प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और मानवता का मार्ग अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक और भौतिक उपलब्धियां मानव जीवन को सुविधाजनक बना सकती हैं, लेकिन उनका सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए नैतिकता, विवेक और आध्यात्मिक चेतना जरूरी है। मनुष्य को बाहरी विकास के साथ अपने अंतर्मन को भी परिष्कृत करना चाहिए, तभी व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक संबंधों और वैश्विक सह-अस्तित्व में सकारात्मक बदलाव संभव होगा।
कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मण राई ने किया। समिति के मूल सचिव प्रकाश हांगखिम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि मानव उत्थान सेवा समिति की सिक्किम राज्य समिति के अध्यक्ष पूर्ण योञ्जन ने स्वागत संबोधन दिया।
सम्मेलन में सिक्किम सहित भारत के विभिन्न राज्यों तथा नेपाल और भूटान से बड़ी संख्या में संत समाज के प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन का समापन 11 अक्टूबर को अपराह्न में होगा।