नागराकाटा: एक ओर केंद्र और राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सस्ते ईंधन की लालच में भारत से भूटान जाने वाले वाहनों की लगातार बढ़ती आवाजाही से चामुर्ची चेकपोस्ट पर स्थिति बेकाबू होती जा रही है। बानरहाट से चामुर्ची जाने वाली अंतरराष्ट्रीय सर्क रोड पर चेकपोस्ट के समीप करीब दो किलोमीटर तक सुबह से शाम तक घंटों यातायात जाम बना रहना अब रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। जाम में केवल छोटे वाहन ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन भारी-भरकम 16 चक्का वाहन भी शामिल हो रहे हैं। कई ऐसे वाहन, जिन्हें इस सड़क पर चलने की अनुमति नहीं है, वे भी चेकपोस्ट के पास सर्क रोड पर खड़े हो जाते हैं। इसके चलते पूरा यातायात तंत्र ठप पड़ जाता है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि व्यापारियों से लेकर आम नागरिकों तक को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती है।इस अव्यवस्था का असर सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं है। सस्ते ईंधन की वजह से अवैध खरीद-बिक्री बढ़ने से केंद्र और राज्य—दोनों सरकारें ईंधन पर लगने वाले कर से वंचित हो रही हैं। पुलिस प्रशासन ने जाम की समस्या को स्वीकार करते हुए बताया कि दिनभर ट्रैफिक नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं और भविष्य में जाम की स्थिति से निपटने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये कदम केवल बयानबाजी तक ही सीमित हैं। उनका कहना है कि हकीकत में भारत–भूटान सीमा पर खुलेआम अवैध ईंधन कारोबार फल-फूल रहा है। सस्ता तेल लाने के लिए वाहनों की लंबी कतारें चेकपोस्ट के पास लग जाती हैं, जिससे पूरा इलाका जाम की चपेट में आ जाता है। वहीं चामुर्ची आउट पोस्ट के ओसी आदिल लिम्बू का कहना है कि ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने की लगातार कोशिश की जा रही है, लेकिन भूटान से ईंधन लाने के लिए वाहनों की लंबी कतार सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
गौरतलब है कि भारत में पेट्रोल की कीमत जहां करीब 106 रुपये प्रति लीटर है, वहीं भूटान में यही पेट्रोल लगभग 55 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध है। इसी बड़े मूल्य अंतर का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में वाहन भूटान जाकर टैंक फुल कराते हैं और लौटते समय सीमा क्षेत्र में ही 85 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से पेट्रोल बेच देते हैं। यह कीमत भारत के अधिकृत पेट्रोल पंपों से भी कम है।
इस अवैध कारोबार का सीधा असर नागराकाटा और बानरहाट इलाके के पेट्रोल पंपों पर पड़ा है, जहां बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा, जिससे अवैध ईंधन कारोबार को परोक्ष रूप से बढ़ावा मिल रहा है।